Friday, April 24, 2026
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छत्तीसगढ़ के NMDC संयंत्र के विनिवेश की तैयारी, पूर्व डिप्टी CM बोले- भाजपा सरकार ने किया धोखा

केंद्रीय वित्त मंत्रालय छत्तीसगढ़ स्थित एनएमडीसी स्टील (NMDC Steel) के लिए अगले दो महीनों में वित्तीय बोलियां आमंत्रित कर सकता है।

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नई दिल्ली, 18 अगस्त। केंद्रीय वित्त मंत्रालय छत्तीसगढ़ स्थित एनएमडीसी स्टील (NMDC Steel) के लिए अगले दो महीनों में वित्तीय बोलियां आमंत्रित कर सकता है। दो वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों ने नाम उजागर नहीं करने की शर्त पर इसकी जानकारी दी।

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बिजनेस स्टैंडर्ड में प्रकाशित समाचार के अनुसार एक अधिकारी ने कहा, ’सरकार का मानना है कि नई विनिवेश योजना के तहत एनएमडीसी स्टील उपयुक्त कंपनी है। संयंत्र नया है और यह शेयरधारकों के लिए ज्यादा मूल्य तैयार कर सकता है। हम अगले दो महीनों में इसके लिए बोलियां मंगाने की संभावना तलाश रहे हैं।’

सरकार ने अक्टूबर 2022 में प्रवर्तक कंपनी एनएमडीसी से छत्तीसगढ़ के नगरनार स्टील प्लांट को अलग कर दिया था। 1 दिसंबर, 2022 को सरकार ने एनएमडीसी स्टील की रणनीतिक बिक्री के लिए अभिरुचि पत्र आमंत्रित किए थे और प्रस्तावित सौदे के लिए कई कंपनियों ने दिलचस्पी दिखाई थी।

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फरवरी 2023 में एनएमडीसी स्टील को 30.25 रुपये शेयर भाव पर स्टॉक एक्सचेंज पर सूचीबद्ध कराया गया। आज कंपनी का शेयर 0.98 फीसदी बढ़त के साथ 53.82 रुपये पर बंद हुआ। एनएमडीसी स्टील का बाजार पूंजीकरण 15,773 करोड़ रुपये रहा।

यही समय है, सही समय है

एनएमडीसी स्टील में सरकार की 60.79 फीसदी हिस्सेदारी है और 39.21 फीसदी आम शेयरधारकों के पास है। सरकार ने कंपनी में अपनी 50.79 फीसदी हिस्सेदारी बेचने के साथ ही प्रबंधन का नियंत्रण भी छोड़ने का निर्णय किया है।

पूर्व डिप्टी सीएम ने कहा- भाजपा सरकार ने किया धोखा

इधर, इस मसले पर छत्तीसगढ़ के पूर्व डिप्टी एवं कांग्रेस नेता सीएम टीएस सिंहदेव ने कहा कि केंद्र और राज्य की भाजपा सरकार ने मिल कर छत्तीसगढ़ के साथ बहुत बड़ा धोखा किया है।

बस्तर में एनएमडीसी स्टील प्लांट के निजीकरण का फैसला बिलकुल दुर्भाग्यपूर्ण और अनैतिक है। कांग्रेस सरकार द्वारा जो ज़मीन सरकारी उद्योग के लिए दी गई थी अब कयास हैं कि उसका इस्तेमाल निजी उद्योग के लिए होगा।

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यह छत्तीसगढ़ में सरकारी रोज़गार पर चोट करेगा, आरक्षण से वंचितों को मिलने वाली सहायता से विहीन कर दिया जाएगा – पहले सरकार के नाम पर ज़मीन और संसाधन का नियंत्रण लेना और फिर उसका चुपके से निजीकरण करना प्रदेशवासियों के साथ उच्च दर्जे का धोखा है।

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