Tuesday, February 10, 2026
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कोल माइंस के सेफ़्टी ऑडिट को लेकर संसद में सवाल, जानें कोयला मंत्री ने क्या जवाब दिया

मंत्रालय द्वारा दिसंबर, 2023 में “सुरक्षा स्वास्थ्य प्रबंधन प्रणाली लेखापरीक्षा“ पर जारी दिशानिर्देशों के अनुसार, सुरक्षा लेखापरीक्षा वार्षिक रूप से की जाती है

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नई दिल्ली, 10 मार्च। कोयला खदानों की सुरक्षा लेखा परीक्षा ऑडिट (safety audit of coal mines) को लेकर राज्यसभा में सवाल किया गया। यह मुद्दा सांसद एम. मोहम्मद अब्दुल्ला ने उठाया है।

मोहम्मद अब्दुल्ला ने कोयला मंत्री से पूछा कि कोयला खदानों में सुरक्षा लेखा परीक्षा के कार्यान्वयन की वर्तमान स्थिति क्या है तथा उन्हें कितने समयांतराल में किया जाता है? श्रमिकों को खतरनाक परिस्थितियों से बचाने के लिए कोयला खनन को आधुनिक बनाने तथा मशीनीकृत करने के लिए क्या कदम उठाए गए हैं? क्या सरकार ने दुर्घटना-प्रवण क्षेत्रों में कोयला खनन के पर्यावरणीय प्रभाव पर कोई अध्ययन किया है और कोयला खनन क्षेत्र में श्रमिकों के कल्याण तथा कौशल विकास में सुधार के लिए क्या पहल की जा रही है?

कोयला एवं खान मंत्री जी. किशन रेड्डी द्वारा लिखित जवाब प्रस्तुत किया गया, जो इस प्रकार है :

(क) : कोयला मंत्रालय द्वारा दिसंबर, 2023 में “सुरक्षा स्वास्थ्य प्रबंधन प्रणाली लेखापरीक्षा“ पर जारी दिशानिर्देशों के अनुसार, सुरक्षा लेखापरीक्षा वार्षिक रूप से की जाती है। दिनांक 17.12.2024 को कोयला मंत्रालय ने लेखापरीक्षा रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए सुरक्षा लेखापरीक्षा मॉड्यूल को शामिल करते हुए “राष्ट्रीय कोयला खान सुरक्षा रिपोर्ट पोर्टल“ शुरू किया है।

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(ख) : खान सुरक्षा महानिदेशालय (डीजीएमएस) ने आधुनिकीकरण, मशीनीकरण, आपातकालीन प्रतिक्रिया तथा निकासी योजना को ध्यान में रखते हुए पुराने कोयला खान विनियम, 1957 को “कोयला खान विनियम 2017“ के रूप में नवीकृत/संशोधित किया है। उपर्युक्त के अलावा,कामगारों को खतरनाक परिस्थितियों से बचाने के लिए कोयला खनन को आधुनिक बनाने तथा मशीनीकृत करने हेतु कोयला कंपनियों द्वारा उठाए गए प्रमुख कदम निम्नानुसार हैंः

1. विस्फोट-मुक्त खनन प्रौद्योगिकियों जैसे सतत खनिक, यूजी खानों में पावर्ड सपोर्ट लॉन्गवाल (पीएसएलडब्ल्यू), सतही खनिक, ओपनकास्ट (ओसी) खानों में एक्सेंट्रिक/वर्टिकल रिप्पर और कोयला सीमों, जो पारंपरिक ओपनकास्ट खनन पद्धति के माध्यम से तकनीकी-आर्थिक रूप से व्यवहार्य नहीं हैं, को निकालने के लिए हाइब्रिड हाई वॉल खनन को शुरू करना।

2. पर्यावरणीय टेलीमॉनिटरिंग सिस्टम (ईटीएमएस) द्वारा यूजी खान पर्यावरण की वास्तविक समय में निगरानी और गैस क्रोमैटोग्राफ का उपयोग त्वरित और सटीक खान वायु नमूनाकरण के लिए किया जाता है।

3. मशीनीकृत रूफ बोल्टिंग प्रणाली अर्थात यूनिवर्सल ड्रिलिंग मशीन (यूडीएम), क्यूयूएडी और रेजिन कैप्सूल सहित ट्विन बोल्टर सिस्टम तथा स्ट्रैटा मॉनिटरिंग के लिए उन्नत उपकरण।

4. धूल को कम करने के लिए ट्रक-माउंटेड फॉग कैनन और स्प्रिंकलर-कम-मिस्ट स्प्रे जैसी धूल दमन प्रणाली।

5. हेवी अर्थ मूविंग मशीनरी (एचईएमएम) ऑपरेटरों और वर्चुअल रियलिटी (वीआर) प्रशिक्षण कार्यक्रमों के लिए सिम्युलेटर आधारित प्रशिक्षण।

6. ढलान और ओवरबर्डन (ओबी) डंप स्थिरता की निगरानी के लिए टोटल स्टेशन, 3 डी टेरिस्ट्रीयल लेजर स्कैनिंग (टीएलएस), और ढलान स्थिरता रडार जैसी आधुनिक प्रौद्योगिकियां।

7. जीपीएस आधारित ऑपरेटर इंडिपेंडेंट ट्रक डिस्पैच सिस्टम (ओआईटीडीएस), एचईएमएम की आवाजाही को ट्रैक करने के लिए बड़े ओसी में जियो-फेंसिंग।

(ग) : नई/विस्तारित कोयला खनन परियोजनाओं के लिए पर्यावरण प्रभाव मूल्यांकन (ईआईए) अध्ययन शुरू किए जाते हैं और पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय से पर्यावरणीय स्वीकृति प्राप्त करने से पूर्व ईआईए/पर्यावरण प्रबंधन योजना (ईएमपी) रिपोर्टों में उपयुक्त उपाय शामिल किए जाते हैं। प्रचालनात्मक चरण के दौरान, आस-पास के पर्यावरण पर कोयला खनन प्रचालनों का प्रभाव आकलन करने के लिए पर्यावरणीय निगरानी की जाती है।

अनुमोदित पर्यावरण प्रभाव मूल्यांकन (ईआईए) अध्ययनों में यथा-उल्लिखित सुरक्षित और स्वस्थ कार्य वातावरण सुनिश्चित करने के लिए भू-तकनीकी और भू-खनन अध्ययनों को ध्यान में रखते हुए सभी कोयला खानों को वैज्ञानिक रूप से योजनाबद्ध और डिजाइन किया जाता है।

(घ) : खान अधिनियम, 1952 के अंतर्गत बनाए गए खान नियम, 1955 में कार्य स्थलों पर खान कामगारों के लिए कल्याणकारी सुविधाओं का प्रावधान है। उक्त नियमों के तहत नियमित स्वास्थ्य जांच, प्राथमिक चिकित्सा, पर्याप्त आश्रय, कैंटीन, खानों और शिशुगृह सुविधाओं में कल्याण अधिकारियों की नियुक्ति आदि के प्रावधान निर्धारित हैं। खान अधिनियम, 1952 और उसके अंतर्गत बनाई गई खान व्यावसायिक प्रशिक्षण नियमावली, 1966 के अंतर्गत प्रशिक्षण और पुनश्वर्या प्रशिक्षण के लिए पर्याप्त प्रावधान किए गए हैं।

कोयला खनन क्षेत्र में कामगारों के कल्याण में सुधार करने के लिए कोयला कंपनियों द्वारा की गई प्रमुख पहलों में पर्याप्त आवास सुविधाएं, स्वच्छ पेयजल, छात्रवृत्तियां, नकद पुरस्कार, वित्तीय सहायता, विशेष रूप से आईआईटी और एनआईटी जैसे संस्थानों में अध्ययन कर रहे बच्चों को वित्तीय सहायता, पर्याप्त शैक्षिक सुविधाएं, स्वास्थ्य देखभाल सुविधाएं, सेवा के दौरान मृत्यु होने की स्थिति में कर्मचारियों की विवाहित, तलाकशुदा और परित्यक्त पुत्रियों को अनुकंपा के आधार पर रोजगार का प्रावधान तथा बुनियादी सुविधाएं सुनिश्चित करने के लिए कैंटीन, शिशुगृह, पिट हेड वाथ और विश्राम आश्रय जैसी सांविधिक कल्याण सुविधाएं शामिल हैं।

इसके अलावा, कोयला खनन क्षेत्र में कामगारों के कौशल विकास में सुधार के लिए की गई प्रमुख पहलों में संरचित व्यावसायिक प्रशिक्षण, उन्नत सिम्युलेटर-आधारित प्रशिक्षण, कामगार निरीक्षकों (डब्ल्यूआई) और सुरक्षा समिति के सदस्यों के लिए प्रशिक्षण, खनन कार्यों के प्रमुख क्षेत्रों पर कार्यशालाएं अर्थात उच्च जोखिम वाले कार्यों में सक्षमता और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ड्रिलिंग, ब्लास्टिंग, रूफ सपोर्टिंग, अग्निशमन पर सुरक्षा, विशेषीकृत रोजगार आधारित प्रशिक्षण प्रदान करना शामिल हैं।

 

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