Thursday, July 16, 2026
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रेलवे को मिली ₹3,907 करोड़ की रफ्तार: ओडिशा-झारखंड में दो बड़ी मल्टी-ट्रैक परियोजनाओं को कैबिनेट की मंजूरी

145 किमी बढ़ेगा रेलवे नेटवर्क, 44 मिलियन टन अतिरिक्त माल ढुलाई क्षमता होगी विकसित; कोयला, लौह अयस्क और इस्पात उद्योग को मिलेगा बड़ा लाभ

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नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (CCEA) ने भारतीय रेलवे की दो महत्वपूर्ण मल्टी-ट्रैकिंग परियोजनाओं को मंजूरी दे दी है। करीब ₹3,907 करोड़ की लागत वाली इन परियोजनाओं से ओडिशा और झारखंड में रेलवे नेटवर्क का विस्तार होगा तथा देश के खनिज एवं औद्योगिक क्षेत्रों को नई गति मिलेगी।

मंजूरी प्राप्त परियोजनाओं में पारादीप–हरिदासपुर रेलखंड का दोहरीकरण (Doubling), राजखरसावां–डांगोअपोसी रेलखंड पर चौथी लाइन (Fourth Line) शामिल हैं। इन परियोजनाओं को 2030-31 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।

145 किलोमीटर बढ़ेगा रेलवे नेटवर्क

इन दोनों परियोजनाओं के पूरा होने पर भारतीय रेलवे के मौजूदा नेटवर्क में लगभग 145 किलोमीटर की वृद्धि होगी। इससे ओडिशा और झारखंड के चार जिलों में रेल कनेक्टिविटी मजबूत होगी तथा यात्री एवं मालगाड़ियों के संचालन में उल्लेखनीय सुधार आएगा।

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कोयला और खनिज परिवहन को मिलेगा बड़ा लाभ

ये परियोजनाएं विशेष रूप से कोयला, लौह अयस्क, डोलोमाइट, चूना पत्थर और जिप्सम जैसे खनिजों के परिवहन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही हैं। परियोजनाओं के पूरा होने के बाद रेलवे को प्रतिवर्ष 44 मिलियन टन अतिरिक्त माल ढुलाई क्षमता प्राप्त होगी। इससे खनन, इस्पात, ऊर्जा और भारी उद्योग क्षेत्रों की लॉजिस्टिक क्षमता में उल्लेखनीय सुधार होगा।

14 लाख लोगों को मिलेगा सीधा लाभ

सरकार के अनुसार, इन परियोजनाओं से लगभग 1,526 गांवों की रेल कनेक्टिविटी बेहतर होगी, जिससे करीब 14 लाख लोगों को प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा। बेहतर रेल संपर्क से रोजगार, व्यापार और क्षेत्रीय आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा।

पर्यटन को भी मिलेगी नई उड़ान

नई रेल क्षमता से कई प्रमुख पर्यटन स्थलों तक पहुंच आसान होगी। इनमें ललितगिरि बौद्ध परिसर, श्री बलदेवजेव मंदिर, मेघाहातुबुरु पहाड़ियां जैसे महत्वपूर्ण पर्यटन स्थल शामिल हैं।

प्रधानमंत्री गति शक्ति योजना के तहत होगा विकास

दोनों परियोजनाएं प्रधानमंत्री गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के अंतर्गत विकसित की जाएंगी। इसका उद्देश्य मल्टी-मॉडल कनेक्टिविटी को मजबूत करना, लॉजिस्टिक लागत कम करना तथा लोगों, वस्तुओं और सेवाओं की निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित करना है।

पर्यावरण संरक्षण में भी मिलेगा लाभ

सरकार का अनुमान है कि परियोजनाओं के पूरा होने से 6 करोड़ लीटर पेट्रोलियम ईंधन की बचत होगी। 29 करोड़ किलोग्राम कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में कमी आएगी। यह पर्यावरणीय लाभ लगभग 1 करोड़ पौधे लगाने के बराबर माना गया है।

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