नई दिल्ली, 01 फरवरी : रविवार को लोकसभा में पेश किए गए बजट 2026- 27 पर आरएसएस (RSS) के श्रमिक संगठन भारतीय मजदूर संघ (BMS) ने कड़ा प्रहार किया है। जारी बयान में बीएमएस ने कहा कि बजट वर्किंग क्लास की सबसे ज़रूरी रोज़ी- रोटी और सोशल सिक्योरिटी की चिंताओं को दूर करने में नाकाम रहा है। पूर्व-बजट बैठकों में बार-बार उठाई गई मांगों की अनदेखी पर भारतीय मजदूर संघ गंभीर असंतोष और तीव्र नाराजगी व्यक्त करता है।
बीएमएस ने कहा कि अवसंरचना विस्तार, औद्योगिक विकास और कौशल निर्माण के माध्यम से आर्थिक वृद्धि पर केंद्रित है, लेकिन यह श्रमिकों की आजीविका, वेतन और सामाजिक सुरक्षा से जुड़े बुनियादी मुद्दों को पूरी तरह नजरअंदाज करता है। हालांकि वस्त्र, मत्स्य पालन, एमएसएमई, पर्यटन, स्वास्थ्य, आयुष, पशुपालन तथा रचनात्मक (एवीजीसी) जैसे श्रम-प्रधान क्षेत्रों पर जोर रोजगार सृजन की संभावना दिखाता है, लेकिन सुरक्षा और सम्मानजनक वेतन के बिना रोजगार को समावेशी विकास नहीं कहा जा सकता।
बीएमएस श्रम संहिताओं की अधिसूचना तथा बैंकिंग क्षेत्र सुधार और “शिक्षा से रोजगार एवं उद्यम” पर उच्चस्तरीय समितियों के गठन पर भी चिंता व्यक्त करता है, क्योंकि श्रमिक-सुरक्षा के बिना सुधार अस्थिरता और असंगठितकरण को बढ़ावा देंगे। पूर्व-बजट बैठकों में बार-बार उठाई गई मांगों की अनदेखी पर भारतीय मजदूर संघ गंभीर असंतोष और तीव्र नाराजगी व्यक्त करता है।
स्कीम वर्कर्स
आंगनवाड़ी, आशा एवं मध्यान्ह भोजन कार्यकर्ताओं के मानदेय में किसी भी प्रकार की वृद्धि न किया जाना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्हें श्रमिक का दर्जा देकर न्यूनतम वेतन एवं सामाजिक सुरक्षा प्रदान करने की मांग को फिर से नजरअंदाज किया गया है, जो जमीनी स्तर पर कार्यरत महिला श्रमिकों के प्रति असंवेदनशीलता दर्शाता है।
ईपीएफ पेंशन (EPS- 95)
ईपीएस- 95 के अंतर्गत पात्रता मानदंडों तथा न्यूनतम पेंशनकृदोनों में कोई वृद्धि घोषित नहीं की गई है। अल्प पेंशन पर जीवन यापन कर रहे सेवानिवृत्त श्रमिकों की यह निरंतर उपेक्षा अस्वीकार्य है। बीएमएस पेंशन में ठोस वृद्धि एवं चिकित्सा सुविधाओं की अपनी मांग को दृढ़ता से दोहराता है।
ईपीएफ एवं ईएसआई कवरेज
EPF और ESI के वेतन-सीमा में वृद्धि न किया जाना अत्यंत चिंताजनक है। इससे बड़ी संख्या में श्रमिक इन महत्वपूर्ण सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के दायरे से बाहर हो जाएंगे, जिससे सार्वभौमिक सामाजिक सुरक्षा का उद्देश्य ही विफल हो जाएगा।
असंगठित क्षेत्र (गिग एवं प्लेटफॉर्म वर्कर्स सहित)
ई-श्रम जैसी पहलों को स्वीकार करते हुए भी, असंगठित क्षेत्र में कार्यरत लगभग 90 प्रतिशत श्रमिकों- जिसमें गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स भी शामिल हैंकृके लिए समर्पित एवं पर्याप्त सामाजिक सुरक्षा कोष का अभाव इस बजट की एक गंभीर विफलता है।
रोजगार एवं नौकरी की सुरक्षा
कौशल विकास की बात स्वागतयोग्य है, किंतु निजीकरण, संविदाकरण और आउटसोर्सिंग के बढ़ते चलन से नौकरी की सुरक्षा, वेतन स्थिरता और श्रमिक अधिकारों पर गंभीर खतरा उत्पन्न होगा।
सरकारी कर्मचारी
आठवें केंद्रीय वेतन आयोग के गठन तथा एनपीएस में सार्थक सुधार पर बजट की चुप्पी से सरकारी कर्मचारियों में व्यापक असंतोष है।
भारतीय मजदूर संघ का स्पष्ट मत है कि केंद्रीय बजट 2026- 27 पूंजी और अवसंरचना केंद्रित है, श्रमिक केंद्रित नहीं।
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