मेघालय में राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) द्वारा 2014 में दस साल के प्रतिबंध लगाए जाने के एक दशक बाद आधिकारिक तौर पर कोयला खनन गतिविधियों को फिर से खोल दिया है। यह राज्य में हरित और विनियमित खनन गतिविधियों की दिशा में एक बड़ा कदम है।
कोयला मंत्रालय (Ministry of Coal) से वैधानिक मंज़ूरी मिलने के बाद मेघालय के पूर्वी जयंतिया हिल्स स्थित सारिंगखम ए कोयला ब्लॉक (Saryngkham A Coal Block) और पश्चिमी खासी हिल्स स्थित पायंडेंगशाहलांग कोयला ब्लॉक (Pyndengshahlang Coal Block) से उत्पादन शुरू हो गया है।
मंत्रालय के अनुसार, सारिंगखम ए ब्लॉक को 10 मार्च, 2025 को खोलने की मंज़ूरी दी गई थी और 3 जून को उत्पादन शुरू हो गया था, जबकि पायंडेंगशाहलांग ब्लॉक को 2 मई को मंज़ूरी दी गई थी और 5 जून को उत्पादन शुरू हो गया था।
एनजीटी द्वारा अप्रेल 2014 में अनियंत्रित रैट-होल खनन से जुड़ी अंधाधुंध पर्यावरणीय तबाही, जल प्रदूषण और खतरनाक कार्य स्थितियों की प्रतिक्रियास्वरूप प्रतिबंध लगाया गया था।
न्यायाधिकरण ने पहले ही इस ओर ध्यान दिलाया था कि ये गतिविधियां पर्यावरण संबंधी कानूनों का उल्लंघन कर रही हैं और खनिकों व स्थानीय निवासियों, दोनों के लिए गंभीर स्वास्थ्य एवं सुरक्षा संबंधी खतरे पैदा कर रही हैं।
कोयला खनन की बहाली दशकों के कानूनी, प्रशासनिक और नियामकीय कार्य के बाद हुई है, जिसका उद्देश्य एक ऐसा ढांचा स्थापित करना था जो यह सुनिश्चित करे कि खनन वैज्ञानिक, कानूनी और पर्यावरण संरक्षण उपायों के साथ किया जाए।
कोयला मंत्रालय ने बताया कि यह उपलब्धि उत्तर-पूर्व की ऊर्जा क्षमता का दोहन करते हुए ज़िम्मेदार और सुरक्षित खनन को प्रोत्साहित करने के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
मंत्रालय ने राज्य सरकारों से वैज्ञानिक कोयला खनन (Scientific coal mining) के विकास को सुगम बनाने और क्षेत्र में कोयला परिवहन अवसंरचना को बढ़ाने का भी अनुरोध किया है।
मंत्रालय ने आगे कहा कि ये पहल भारत की ऊर्जा सुरक्षा को बेहतर बनाने और उत्तर-पूर्वी राज्यों के आर्थिक विकास में योगदान देने में मदद करेगी।
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