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कोरबा, 24 अक्टूबर। कोल इंडिया (CIL) की अनुषांगिक कंपनी एसईसीएल की 12 कोयला खनन परियोजनाएं पर्यावरण मंजूरी और भूमि अधिग्रहण में देरी जैसे कारणों से निर्धारित समय से पीछे चल रही हैं।

साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (SECL) की एक रिपोर्ट के अनुसार इन परियोजनाओं में से तीन खदानों की लागत 500 करोड़ रुपए और उससे अधिक है। पांच खदानों की लागत 150 करोड़ रुपए और उससे अधिक, लेकिन 500 करोड़ रुपए से कम है।

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दो खदानों की लागत 100 करोड़ रुपए और उससे अधिक, लेकिन 150 करोड़ रुपए से कम तथा एक खदान की लागत 50 करोड़ रुपए और उससे अधिक, किंतु 100 करोड़ रुपए से कम है। एक खदान की लागत 20 करोड़ रुपए और उससे अधिक, लेकिन 50 करोड़ रुपए से कम है।

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देरी वाली कुछ परियोजनाओं में प्रमुख रूप से आमाडांड ओपन कास्ट खदान, अमगांव ओपन कास्ट परियोजना और विजय वेस्ट भूमिगत खदान है। एसईसीएल की 30 चालू परियोजनाओं में 18 निर्धारित समय पर चल रही हैं, जबकि 12 परियोजनाओं में विलंब हो रहा है।

बताया गया है कि 500 करोड़ रुपए या उससे अधिक लागत वाली परियोजनाओं की निगरानी कोयला मंत्रालय द्वारा मासिक परियोजना समीक्षा बैठकों के माध्यम से की जा रही है। 150 करोड़ रुपए और उससे अधिक लागत वाली परियोजनाओं की निगरानी सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय की एक ऑनलाइन कम्प्यूटरीकृत निगरानी प्रणाली के माध्यम से की जा रही है।

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यहां बताना होगा कि एसईसीएल में 44,571 करोड़ रुपए की स्वीकृत पूंजी के साथ 302.75 मिलियन टन प्रति वर्ष की कुल अंतिम क्षमता के लिए 73 प्रमुख कोयला परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है। इनमें 38 परियोजनाओं का काम पूरा हो चुका है।

चालू वित्तीय वर्ष में एसईसीएल के समक्ष 212 मिलियन टन का लक्ष्य है। 23 अक्टूबर की स्थिति में कंपनी का उत्पादन 81.43 मिलियन टन पर पहुंचा है। जबकि 100 मिलियन टन का आंकड़ा पार हो जाना चाहिए था।

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