कोरबा, 12 फरवरी। चारों लेबर कोड सहित अन्य मांगों को लेकर 12 फरवरी को 10 केंद्रीय श्रम संगठनों द्वारा बुलाई गई देशव्यापी आम हड़ताल (general strike) का मिला- जुला असर देखने को मिला है। दूसरी ओर श्रमिक संगठनों ने दावा किया है कि हड़ताल सफल रही है।

सीटू द्वारा जारी बयान के अनुसार देश के 2,000 से अधिक स्थानों पर हजारों मजदूरों, किसानों और ग्रामीण श्रमिकों ने विशाल रैलियां आयोजित कीं, जिससे यह भारत की सबसे बड़ी हड़तालों में से एक सिद्ध हुई। इस हड़ताल में संगठित और असंगठित क्षेत्र, सार्वजनिक और निजी उपक्रम, बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ, योजना कर्मी तथा ग्रामीण मजदूरों की व्यापक भागीदारी रही।

कई स्थानों पर डराने-धमकाने, निषेधाज्ञा लागू होने, कुछ प्रतिष्ठानों में न्यायालयीय प्रतिबंधों और श्रमिक- विरोधी ताकतों द्वारा छिटपुट हमलों के बावजूद, हड़ताल अनुशासित, व्यापक और संघर्षशील रही। सीटू ने कहा कि जनता का मनोभाव स्पष्ट रूप से श्रम संहिताओं (लेबर कोड्स) और अन्य मजदूर-विरोधी नीतियों के विरुद्ध आर-पार की लड़ाई के संकल्प को दर्शाता है। भारत-अमेरिका समझौते के विरुद्ध भी किसानों की व्यापक भागीदारी रही। केरल, ओडिशा, त्रिपुरा तथा कुछ अन्य राज्यों में तो बंद जैसी स्थिति रही।

कोयला एवं खनन क्षेत्र
श्रमिक संगठनों ने दावा किया कि कोल इंडिया लिमिटेड उसकी सहायक कंपनियों में हड़ताल 83 प्रतिशत सफल रही। झारखंड के धनबाद, बोकारो, गिरिडीह; ओडिशा के तालचर और इब वैली; छत्तीसगढ़ के कोरबा; मध्यप्रदेश एवं उत्तरप्रदेश के सिंगरौली; महाराष्ट्र के चंद्रपुर एवं नागपुर क्षेत्र तथा पश्चिम बंगाल के रानीगंज- आसनसोल में उत्पादन और परिवहन प्रभावित हुआ। तेलंगाना की सिंगरेनी कोलियरिज में लगभग 90 प्रतिशत भागीदारी रही, जिससे उत्पादन और कोयला परिवहन ठप हो गया। एचएमएस, इंटक, सीटू, एटक के लोग हड़ताल में सम्मिलित रहे। बीएमएस ने हड़ताल का समर्थन नहीं किया था।

बिजली एवं ऊर्जा क्षेत्र
तमिलनाडु में 13,040 कर्मचारी अनुपस्थित रहे। केरल में लगभग 95 प्रतिशत भागीदारी के कारण लगभग पूर्ण बंद की स्थिति रही। हिमाचल प्रदेश में कई प्रतिष्ठानों में 100 प्रतिशत भागीदारी दर्ज की गई। पंजाब में 25,000 से अधिक बिजली कर्मचारी हड़ताल में शामिल हुए। महाराष्ट्र में कई इकाइयों में 100 प्रतिशत कार्य बहिष्कार रहा। पूर्वोत्तर और दक्षिणी राज्यों में पावर ग्रिड कॉर्पोरेशन इकाइयों में लगभग पूर्ण भागीदारी रही।

पेट्रोलियम, रिफाइनरी एवं गैस क्षेत्र
असम के डिगबोई, बोंगाईगांव और नुमालीगढ़ रिफाइनरियों में ठेका श्रमिकों ने पूर्ण हड़ताल की। कोच्चि, कोझिकोड, मंगलुरु, महाराष्ट्र और गुजरात की कई इकाइयों में एलपीजी बॉटलिंग प्लांट और पेट्रोलियम डिपो प्रभावित हुए। बीपीसीएल मुंबई रिफाइनरी, एचपीसीएल मुंबई और ओएनजीसी प्रतिष्ठानों में प्रदर्शन हुए।

बंदरगाह, परिवहन एवं उद्योग
पारादीप, काकीनाडा, कोचीन, कोलकाता और तूतीकोरिन बंदरगाहों पर कार्य प्रभावित या पूर्णतः बंद रहा। पंजाब और ओडिशा में सड़क परिवहन ठप रहा। केरल में निजी बसें, ऑटो, टैक्सी और मालवाहक वाहन सड़कों से गायब रहे। तमिलनाडु के ऑटोमोबाइल और इंजीनियरिंग हब- श्रीपेरंबुदूर, ओरगडम और मराइमलाई नगर में लगभग 40 कंपनियों में उत्पादन प्रभावित हुआ। कोचीन सेज में 200 फैक्ट्रियाँ बंद रहीं। मध्यप्रदेश के सतना, मैहर और नीमच के सीमेंट संयंत्र बंद रहे।

बैंकिंग एवं वित्तीय क्षेत्र
कई राज्यों में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक आंशिक या पूर्णतः बंद रहे। एलआईसी और जीआईसी कार्यालयों में व्यापक भागीदारी रही।
योजना कर्मी एवं असंगठित क्षेत्र
आंगनबाड़ी, आशा और मिड-डे मील कर्मियों ने बड़े पैमाने पर भागीदारी की। निर्माण श्रमिक, नगर पालिका सफाई कर्मचारी, घरेलू कामगार, गिग वर्कर और खेत मजदूरों ने व्यापक समर्थन दिया।
मजदूर और किसान दबाव में झुकने वाले नहीं : एलामारम करीम
सीटू के महासचिव एलामारम करीम ने कहा कि 12 फरवरी की आम हड़ताल ने सिद्ध कर दिया है कि भारत के मजदूर और किसान किसी भी दबाव के सामने झुकने वाले नहीं हैं। कोयला खदानों से लेकर रिफाइनरियों, बंदरगाहों, कारखानों, बागानों और वित्तीय संस्थानों तक, देश के मेहनतकश लोगों ने अपनी एकता और संघर्ष का परिचय दिया है। संयुक्त संघर्ष आने वाले दिनों में और अधिक मजबूती और समन्वय के साथ जारी रहेगा।
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