Friday, March 13, 2026
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उत्तर प्रदेश की बिजली वितरण व्यवस्था का होगा निजीकरण, घाटे से नहीं उबर पा रहा पॉवर कारपोरेशन

बैठक में सुझाव दिया गया कि ज्यादा घाटे वाले क्षेत्रों की वित्तीय स्थिति को सार्वजनिक निजी सहभागिता के आधार पर सुधारा जाए।

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लखनऊ। उत्तर प्रदेश पॉवर कारपोरेशन लिमिटेड (UPPCL) द्वारा प्रदेश की बिजली आपूर्ति व्यवस्था को अब निजी क्षेत्र में सौंपा जाएगा। यह निर्णय बढ़ते घाटे को देखते हुए लिया जा रहा है। पीपीपी (पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप) माडल के तहत पहले राज्य के सर्वाधिक घाटे वाले पूर्वांचल व दक्षिणांचल डिस्काम (विद्युत वितरण निगमों) वाले क्षेत्रों को निजी हाथों में सौंपा जाएगा।

पावर कारपोरेशन के अध्यक्ष डा. आशीष कुमार गोयल ने शक्तिभवन मुख्यालय में डिस्काम के प्रबंध निदेशकों से लेकर मुख्य अभियंताओं की एक बैठक ली थी। इसमें ऊर्जा क्षेत्र को घाटे से उबारने के बारे में सुझाव मांगे गए थे। ज्यादातर ने ओडिशा में पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप के तहत टाटा पावर द्वारा की जा रही बिजली आपूर्ति के माडल का अध्ययन कर अपनाने सुझाव दिया था।

आरडीएसएस (संशोधित वितरण क्षेत्र योजना) को लेकर बुलाई गई बैठक में अध्यक्ष द्वारा वितरण निगमों की खराब वित्तीय स्थिति का जिक्र करते हुए कहा गया कि तमाम कोशिशों के बावजूद कारपोरेशन का घाटा बढ़ता जा रहा है। जितनी बिजली खरीदी जा रही है उतने विद्युत राजस्व की वसूली नहीं हो रही है।

प्रदेशवासियों को बिजली आपूर्ति के लिए मौजूदा वित्तीय वर्ष में ही कारपोरेशन को सरकार से 46,130 करोड़ रुपये के सहयोग की जरूरत पड़ी है। यही स्थिति रहने पर अगले वर्ष लगभग 50-55 हजार करोड रूपये तथा फिर 60-65 हजार करोड़ रुपये की आवश्यकता होगी।

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बैठक में सुझाव दिया गया कि ज्यादा घाटे वाले क्षेत्रों की वित्तीय स्थिति को सार्वजनिक निजी सहभागिता के आधार पर सुधारा जाए। बैठक में कहा गया कि अपनाए जाने वाले पीपीपी माडल में निजी कंपनी का प्रबंध निदेशक और अध्यक्ष सरकार का होगा।

सुझावों पर अध्यक्ष ने कहा कि प्रबंधन, अधिकारियों-कर्मचारियों की सेवा शर्ते, सेवा निवृत्ति लाभ आदि में कोई कमी नहीं होने देगा। अधिकारी-कर्मचारियों को तीन विकल्प दिए जाएंगे। वे चाहेंगे तो जहां हैं वहीं पीपीपी मॉडल पर काम करने वाली नई कंपनी में बने रह सकेंगे। नई कंपनी में न जाकर वह पावर कारपोरेशन के दूसरे डिस्काम में आ सकेंगे। दोनों ही विकल्प न अपनाने वालों के लिए आकर्षक वीआरएस (स्वैच्छिक सेवानिवृति) ले सकेंगे।

अध्यक्ष ने यह भी स्पष्ट किया कि ऊर्जा निगमों को घाटे से उबारने के लिए सुधार प्रक्रिया में सहयोग करने वाले अधिकारियों-कर्मचारियों को राज्य सरकार नयी कंपनी में हिस्सेदारी (शेयरहोल्डिंग) देने पर भी विचार करेगी।

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