नागपुर। IndustrialPunch: वेस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (WCL) मुख्यालय में 24 अगस्त, 2026 को Group Gratuity Trust की 27वीं बैठक आयोजित हुई। बैठक की अध्यक्षता WCL के अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक डॉ. हेमंत पाण्डेय ने की। बैठक में ट्रस्ट मंडल के सदस्यों और कंपनी के निदेशकगण शामिल हुए।
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बैठक में लंबित Group Gratuity मामलों को लेकर महत्वपूर्ण चर्चा हुई। बैठक में कर्मचारी हितों से जुड़े मामलों को प्राथमिकता देते हुए CMD डॉ. हेमंत पाण्डेय ने अधिकारियों को सभी लंबित Group Gratuity प्रकरणों का 15 सितंबर 2026 तक निपटारा करने के निर्देश दिए।
लगभग दो साल बाद हुई ट्रस्ट की बैठक
प्राप्त जानकारी के अनुसार Group Gratuity Trust की बैठक करीब दो वर्ष के अंतराल के बाद आयोजित हुई। बैठक में निदेशक (वित्त/एचआर) एवं ट्रस्टी बिक्रम घोष, निदेशक (तकनीकी) एवं ट्रस्टी संदीप परांजपे, ट्रस्टी शिवकुमार यादव, सचिव (ट्रस्टी) आशीष मूर्ति, एस.एच. बेग, टी.एन. मस्के, मनोज अडे तथा महाप्रबंधक (HR/IR) एवं ट्रस्टी पी.एस. लाल सहित अन्य सदस्य उपस्थित रहे।
600 Group Gratuity मामलों को लेकर उठे सवाल
बैठक में ट्रस्टी शिवकुमार यादव ने WCL में करीब 600 Group Gratuity प्रकरण लंबित होने का मुद्दा उठाया। उनका कहना था कि इन मामलों के लंबित रहने से संबंधित कर्मचारियों के परिवारों, विशेषकर महिलाओं और बच्चों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
उन्होंने सवाल उठाया कि यदि कर्मचारियों के परिवारों को मिलने वाली राशि लंबे समय तक लंबित रहेगी तो प्रभावित परिवारों के सामने आर्थिक और सामाजिक कठिनाइयां खड़ी होना स्वाभाविक है।
15 सितंबर तक निपटाने का निर्देश
बैठक में CMD डॉ. हेमंत पाण्डेय की ओर से अधिकारियों को निर्देशित किया गया कि 15 सितंबर तक सभी लंबित Group Gratuity मामलों का निपटारा किया जाए।
साथ ही अगली बैठक भी 15 सितंबर 2026 को आयोजित करने का निर्णय लिया गया है। बताया गया है कि आगामी बैठक में कुछ कानूनी एवं नियमों से जुड़े विषयों पर भी चर्चा हो सकती है।
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ट्रस्ट की राशि और आय-व्यय का मुद्दा भी उठा
बैठक को लेकर जारी आरोपों में ट्रस्ट में जमा राशि के आय-व्यय और उसके उपयोग को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि इस सामग्री से नहीं होती है।
संगठन की ओर से यह भी दावा किया गया है कि ट्रस्ट में जमा राशि से बड़ी मात्रा में ब्याज प्राप्त होता है और कर्मचारियों के हित में इसके उपयोग को लेकर पारदर्शिता जरूरी है।
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