रांची। IndustrialPunch: 12वें संयुक्त द्विपक्षीय समिति (JBCCI- XII) के गठन और आगामी वेतन समझौते को लेकर कोयला क्षेत्र में गतिविधियां तेज हो गई हैं। भारतीय मजदूर संघ (BMS) से सम्बद्ध अखिल भारतीय खदान मजदूर संघ ने स्पष्ट किया है कि इस बार केवल वेतन समझौता नहीं, बल्कि मेडिकल, सिक लीव, ईएल, प्रमोशन, कैडर स्कीम और एसएलपी जैसी कर्मचारी सुविधाओं पर भी एक साथ निर्णय होना चाहिए।
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यह बात संघ के महामंत्री सुजीत सिंह ने 25 अगस्त को रांची में मीडिया से बातचीत के दौरान कही। वे CMPDI कर्मचारी संघ के अधिवेशन में शामिल होने रांची पहुंचे थे।
2 सितंबर की बैठक पर टिकी नजर
सुजीत सिंह ने कहा कि 2 सितंबर को Apex JCC की बैठक प्रस्तावित है और इसमें JBCCI- XII के गठन को लेकर सकारात्मक पहल होने की उम्मीद है।
उन्होंने कहा कि जबलपुर हाईकोर्ट में चल रहे मामले के कारण JBCCI- XII के गठन में किसी तरह की परेशानी नहीं होनी चाहिए। उनके अनुसार इस मामले में Coal India Management ने अपना पक्ष मजबूती से नहीं रखा है।
A-1 और E-1 वेतन तुलना पर उठाया सवाल
BMS महामंत्री ने कहा कि एक कामगार करीब 25 साल की सेवा के बाद A-1 ग्रेड तक पहुंचता है। ऐसे में उसके वेतन की तुलना अधिकारी के E-1 ग्रेड से करना उचित नहीं है। उन्होंने संकेत दिया कि वेतन विसंगति से जुड़े मामले को लेकर संगठन अपनी बात मजबूती से रखेगा।
इस बार सिर्फ वेतन नहीं, सुविधाओं पर भी फैसला
सुजीत सिंह ने कहा कि अब तक JBCCI में वेतन समझौता तो हो जाता है, लेकिन कामगारों की कई महत्वपूर्ण सुविधाओं पर तत्काल फैसला नहीं हो पाता।
उन्होंने मेडिकल, सिक लीव, अर्जित अवकाश (EL), प्रमोशन, कैडर स्कीम और SLP जैसे मुद्दों का उल्लेख करते हुए कहा कि इन विषयों को अक्सर Standardisation Committee के पास छोड़ दिया जाता है।
उनके मुताबिक समिति की कई बैठकें होने के बावजूद इन मुद्दों पर निर्णय में देरी होती है और आवश्यक Office Order जारी नहीं हो पाता। इसका सीधा असर कर्मचारियों को मिलने वाली सुविधाओं पर पड़ता है।
अन्य श्रमिक संगठनों से होगी बातचीत
BMS ने इस बार वेतन के साथ कर्मचारी सुविधाओं पर भी एक साथ निर्णय कराने की रणनीति बनाई है। सुजीत सिंह ने कहा कि इस मुद्दे पर अन्य श्रमिक संगठनों के प्रतिनिधियों से भी बातचीत की जाएगी।
उन्होंने उम्मीद जताई कि सभी संगठन इस विषय पर एकजुट होंगे और ऐसा समझौता कराने की दिशा में काम करेंगे, जिसका लाभ कर्मचारियों को तत्काल मिल सके।
लेबर कोड का भी विरोध
BMS महामंत्री ने कहा कि लेबर कोड अभी पूरी तरह लागू नहीं हुआ है और संगठन इसके कई प्रावधानों का विरोध कर रहा है। उन्होंने बताया कि इस संबंध में श्रम मंत्री को भी अवगत कराया गया है और उम्मीद है कि भारत सरकार आवश्यक सुधार करेगी।
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अनुकंपा नियुक्ति के मामलों को JBCCI में शामिल करने की तैयारी
सुजीत सिंह ने अनुकंपा नियुक्ति से जुड़े मामलों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि अनुकंपा पर नौकरी पाने वाले कर्मचारियों से परिवार के भरण-पोषण का एफिडेविट लिया जाता है।
यदि बाद में परिवार की ओर से उपेक्षा की शिकायत आती है तो जांच के बाद संबंधित कर्मचारी के वेतन से राशि काटकर पात्र परिवारजनों को दिए जाने के उदाहरण सामने आए हैं। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे को भी आगामी JBCCI- XII समझौते में शामिल कराने का प्रयास किया जाएगा।
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