राउरकेला। Steel Authority of India Limited (SAIL) के Rourkela Steel Plant (RSP) में स्थापित किया जा रहा 20 लाख टन वार्षिक क्षमता का अत्याधुनिक पेलेट प्लांट अब निर्माण के अंतिम चरण में पहुंच गया है। यह परियोजना संयंत्र की दक्षता बढ़ाने, संसाधनों के बेहतर उपयोग और सतत इस्पात उत्पादन को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
यह पेलेट प्लांट लौह अयस्क को उच्च गुणवत्ता वाले ब्लास्ट फर्नेस ग्रेड पेलेट्स में परिवर्तित करने के लिए डिजाइन किया गया है। परियोजना का लक्ष्य फरवरी 2027 तक पूरा होना है।
पेलेट प्लांट के माध्यम से खनन कार्यों के दौरान उत्पन्न होने वाले अत्यंत महीन लौह अयस्क कणों (Iron Ore Fines) का उत्पादक उपयोग किया जाएगा, जो पारंपरिक सिंटर निर्माण के लिए उपयुक्त नहीं होते हैं। इससे उच्च गुणवत्ता वाले पेलेट्स की निरंतर उपलब्धता सुनिश्चित होगी, जिससे ब्लास्ट फर्नेस की उत्पादकता बढ़ेगी, स्लैग निर्माण में कमी आएगी तथा फर्नेस की समग्र दक्षता में सुधार होगा।
इसके साथ ही कोक की खपत कम होगी, जिससे हॉट मेटल उत्पादन लागत में कमी आएगी। यह परियोजना राउरकेला स्टील प्लांट की संसाधन संरक्षण, लागत प्रभावी संचालन और पर्यावरण-अनुकूल इस्पात उत्पादन के प्रति प्रतिबद्धता को और मजबूत करेगी।
परियोजना विश्व स्तर पर प्रमाणित “ग्रेट-किल्न प्रोसेस टेक्नोलॉजी” पर आधारित है, जो अपनी विश्वसनीयता, दक्षता और सफल संचालन के लिए जानी जाती है। इसका निर्माण ओडिशा मेटैलिक्स प्राइवेट लिमिटेड तथा रोजमेरी स्पंज एंड स्टील प्राइवेट लिमिटेड के कंसोर्टियम द्वारा निर्माण, प्रबंधन एवं रखरखाव (Construction, Management and Maintenance) आधार पर किया जा रहा है।
वर्तमान में परियोजना में अधिकांश सिविल और स्ट्रक्चरल कार्य लगभग पूरे हो चुके हैं। विभिन्न सर्किटों और इकाइयों के एकीकरण का कार्य तेजी से चल रहा है, जबकि कई महत्वपूर्ण प्रोसेसिंग सुविधाएं आकार ले चुकी हैं। 120 मीटर ऊंची प्रोसेस चिमनी का निर्माण भी परियोजना की एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।
परियोजना पूरी होने के बाद यह पेलेट प्लांट राउरकेला स्टील प्लांट के लिए एक महत्वपूर्ण रणनीतिक परिसंपत्ति के रूप में उभरेगा, जो लागत प्रभावी, संसाधन-संरक्षण आधारित और पर्यावरण के अनुकूल इस्पात उत्पादन को नई मजबूती प्रदान करेगा।
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