जेपी ग्रुप (JP Group) के लिए वेदांता द्वारा सबसे अधिक बोली लगाने के बावजूद कंपनी को इस सौदे से बाहर कर दिया गया है। कम बोली लगाने वाली अडानी इंटरप्राइजेस के हाथ में जेपी ग्रुप जाता दिख रहा है। इधर, वेदांता ग्रुप के चेयरमैन अनिल अग्रवाल ने बोली को लेकर फैसला बदले जाने पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है और कहा है कि इस मामले को कानूनी तौर पर चुनौती दी जाएगी।
सोशल मीडिया प्लेटफार्म के माध्यम से वेदांता ग्रुप (Vedanta Group) के चेयरमैन अनिल अग्रवाल ने अपनी बात रखी। उन्होंने अपनी पोस्ट में लिखा है कि कुछ साल पहले की बात है। जेपी ग्रुप बनाने वाले श्री जयप्रकाश गौड़ जी लंदन में मुझसे मिलने आए थे। उन्होंने अपनी कड़ी मेहनत और विज़न से एक बड़ा साम्राज्य खड़ा किया था। वो मुझसे एक से ज़्यादा बार मिले। उनकी इच्छा बहुत सरल और स्पष्ट थी कि उन्होंने जो कुछ भी बनाया है, वो सुरक्षित हाथों में जाए और सही नीयत के साथ आगे बढ़े। उन्होंने हिंदी में, अपने शब्दों में पत्र लिखकर मुझ पर विश्वास जताया था। लेकिन उस समय हम इस दिशा में आगे नहीं बढ़ पाए थे।
अनिल अग्रवाल ने कहा कि हाल ही में, IBC प्रक्रिया के तहत लेनदारों की समिति (CoC) द्वारा इस एसेट की सार्वजनिक नीलामी की गई। इसमें कई बड़े bidders ने हिस्सा लिया था, और तब मुझे जयप्रकाश गौड़ जी की भावनाएं और उनकी इच्छा याद आ गई। नीलामी की प्रक्रिया के दौरान एक-एक करके सभी bidders पीछे हटते गए और अंत में सार्वजनिक रूप से हमें highest bidder घोषित किया गया।
यह पूरी तरह से एक पारदर्शी प्रक्रिया थी। हमें लिखित में बताया गया कि हम जीत गए हैं। लेकिन जीवन इतना सरल नहीं होता। कुछ दिनों बाद वो फैसला बदल दिया गया। मैं यहाँ उसकी बारीकियों में नहीं जाना चाहता, क्योंकि उन्हें सही मंच पर रखा जाना चाहिए। पर मैं अपने दिल की एक बात ज़रूर साझा करना चाहता हूँ।
अनिल अग्रवाल ने कहा कि हमें उस asset से कोई मोह या लगाव नहीं है। अगर वो हमें मिलता है, तो ईश्वर की कृपा है। अगर हाथ से जाता है, तो भी उनकी ही मर्ज़ी है। लेकिन एक बात हम मज़बूती से मानते हैं कि जब धर्मपूर्वक कोई वादा किया गया हो, तो उसे वापस नहीं लिया जाना चाहिए। हमारे शास्त्रों में भी बार-बार यही बताया गया है कि सत्य, प्रतिबद्धता और निष्पक्षता को सबसे ऊपर रखा जाना चाहिए।
अनिल अग्रवाल ने कहा कि अब सवाल यह है कि अगर ऐसा ना हो तो इंसान क्या करे? गीता इसका सरल उत्तर देती है। बिना किसी क्रोध या लगाव के साहस के साथ अपना कर्तव्य करते रहो। हम भी वही करेंगे। तथ्यों को सही तरीके से सामने रखेंगे और सही रास्ते पर चलेंगे।
Adani Enterprises को मिली मंजूरी
इस बीच Adani Enterprises की बोली को NCLT की इलाहाबाद बेंच ने 17 मार्च को मंजूरी दे दी है और उसे सफल रिजॉल्यूशन एप्लिकेंट माना गया। Vedanta ने इस फैसले को NCLAT में चुनौती दी है, जिससे अब मामला कानूनी लड़ाई में बदल गया है।
ज्यादा रकम के बावजूद Vedanta पीछे क्यों
Adani Enterprises को नवंबर 2025 में 14,535 करोड़ रुपये की बोली के साथ कर्जदाताओं की मंजूरी मिली थी। इस प्रक्रिया में Vedanta के अलावा Dalmia Cement, Jindal Power और PNC Infratech जैसी कंपनियां भी शामिल थीं। रिपोर्ट्स के मुताबिक Vedanta की कुल बोली करीब 16,000 करोड़ रुपये थी, जो ज्यादा थी।
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