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नई दिल्ली। कोयला मंत्रालय ने स्वच्छ कोयला प्रौद्योगिकी (Clean Coal Technologies) पर केंद्रित एक BRICS साइड इवेंट का आयोजन किया, जिसमें विशेष रूप से कोयला गैसीकरण (Coal Gasification) पर चर्चा की गई। कार्यक्रम में भारत के वरिष्ठ सरकारी अधिकारी, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के प्रतिनिधि, उद्योग जगत, प्रौद्योगिकी प्रदाता तथा रूस, इथियोपिया और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के BRICS प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कोयला मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव श्री सनोज़ कुमार झा ने कहा कि कोयला गैसीकरण भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने और औद्योगिक विकास को गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। उन्होंने बताया कि इस तकनीक के माध्यम से कोयले को सिंगैस (Syngas) में परिवर्तित किया जाता है, जिसका उपयोग अमोनिया, मेथेनॉल, हाइड्रोजन, सिंथेटिक ईंधन, डीआरआई (DRI) और अन्य मूल्यवर्धित उत्पादों के निर्माण में किया जा सकता है।

उन्होंने कहा कि कोयला गैसीकरण से आयात पर निर्भरता कम होगी और घरेलू कोयला संसाधनों का अधिक प्रभावी उपयोग संभव हो सकेगा। श्री झा ने दोहराया कि भारत सरकार वर्ष 2030 तक 10 करोड़ टन (100 मिलियन टन) कोयले के गैसीकरण का लक्ष्य लेकर काम कर रही है। इसके लिए नीतिगत समर्थन, वित्तीय प्रोत्साहन, सुनिश्चित कोयला लिंकज और विभिन्न मंत्रालयों के बीच समन्वित प्रयास किए जा रहे हैं।

कार्यशाला के दौरान बीएचईएल (BHEL) ने कोयला गैसीकरण तकनीक पर प्रस्तुति दी, जबकि जिंदल स्टील लिमिटेड (JSL) और ग्रेटा एनर्जी ने अपने गैसीकरण परियोजनाओं और BRICS देशों के लिए इसकी उपयोगिता पर प्रकाश डाला।

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ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (ECL) ने कास्ता अंडरग्राउंड कोल गैसीफिकेशन (UCG) पायलट परियोजना की प्रगति की जानकारी दी। वहीं, नामित प्राधिकरण (Nominated Authority) ने यूसीजी से संबंधित कोयला ब्लॉक आवंटन और नीतिगत पहलों पर प्रस्तुति दी। कोल इंडिया लिमिटेड (CIL) ने कोयला लिंकज प्रावधानों और कंपनी द्वारा संचालित गैसीकरण परियोजनाओं की जानकारी साझा की।

कार्यक्रम के दौरान आयोजित इंटरैक्टिव पैनल चर्चा में कोयला गैसीकरण की तकनीक, परियोजनाओं की आर्थिक व्यवहार्यता, भू-वैज्ञानिक और प्रसंस्करण संबंधी चुनौतियां, उच्च राख (High Ash) वाले भारतीय कोयले के उपयोग तथा आवश्यक नीतिगत और वित्तीय समर्थन जैसे विषयों पर विस्तृत विचार-विमर्श किया गया।

इस आयोजन ने BRICS देशों और अन्य हितधारकों को ज्ञान एवं अनुभव साझा करने का अवसर प्रदान किया तथा ऊर्जा सुरक्षा, औद्योगिक विकास और कोयले के स्वच्छ उपयोग में कोयला गैसीकरण की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित किया।

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