कोरबा | Industrial Punch : जेबीसीसीआई- XII के गठन और 12वें राष्ट्रीय कोयला वेतन समझौते (NCWA- XII) की वार्ता शुरू करने की मांग को लेकर चार प्रमुख श्रमिक संगठनों का दो चरणों का आंदोलन पूरा हो चुका है। इसके बावजूद कोल इंडिया प्रबंधन की ओर से अब तक कोई स्पष्ट पहल सामने नहीं आई है।
चारों श्रमिक संगठनों एचएमएस, इंटक, सीटू और एटक के संयुक्त आंदोलन के बाद अब निगाहें आगामी 12 सितंबर को रांची में प्रस्तावित संयुक्त कन्वेंशन पर टिक गई हैं।
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12 सितंबर को रांची में जुटेंगे मजदूर संगठन
संयुक्त मोर्चा अब रांची में होने वाले कन्वेंशन की तैयारियों में जुटने जा रहा है। बताया गया है कि इसमें चारों यूनियनों के पदाधिकारी और बड़ी संख्या में सदस्य शामिल होंगे।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि 12 सितंबर तक यदि कोल इंडिया प्रबंधन JBCCI- XII के गठन को लेकर कोई सकारात्मक रुख नहीं अपनाता है तो संयुक्त मोर्चा क्या अगला कदम उठाएगा?
सूत्रों के मुताबिक, ऐसी स्थिति में कन्वेंशन में कामबंद हड़ताल जैसे बड़े आंदोलनात्मक निर्णय पर भी विचार किया जा सकता है।
BMS का दूसरा चरण 17 से 24 अगस्त तक
इधर, बीएमएस से संबद्ध अखिल भारतीय खदान मजदूर संघ (ABKMS) का दूसरा चरण का आंदोलन 17 से 24 अगस्त तक प्रस्तावित है। यानी JBCCI- XII के गठन का मुद्दा अगस्त में भी कोयला उद्योग के श्रमिक संगठनों के आंदोलन के केंद्र में बना रहेगा। इससे कोल इंडिया प्रबंधन पर आने वाले दिनों में और दबाव बढ़ने की संभावना है।
30 जून को खत्म हो चुका NCWA- XI
यहां महत्वपूर्ण है कि NCWA- XI की अवधि 30 जून 2026 को समाप्त हो चुकी है। श्रमिक संगठनों की मांग है कि नए वेतन समझौते की वार्ता शुरू करने के लिए तत्काल JBCCI- XII का गठन किया जाए, लेकिन अब तक प्रबंधन की ओर से इस दिशा में कोई स्पष्ट निर्णय सामने नहीं आने से श्रमिक संगठनों में नाराजगी बढ़ रही है।
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क्या नए Labour Codes से बदलेगा वार्ता का रास्ता?
इसी बीच कोयला उद्योग में एक और चर्चा तेज है। संभावना जताई जा रही है कि नए Labour Codes के तहत वार्ताकार परिषद (Negotiating Council) के माध्यम से वेतन समझौते की प्रक्रिया शुरू करने का विकल्प सामने आ सकता है। हालांकि, यह अभी संभावना और चर्चा का विषय है। इस संबंध में कोल इंडिया प्रबंधन की ओर से कोई आधिकारिक निर्णय सामने नहीं आया है।
वहीं, जबलपुर हाईकोर्ट के फैसले से जुड़े कानूनी पहलू को भी इस पूरे मामले में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस कानूनी स्थिति का वास्तविक प्रभाव क्या होगा, यह संबंधित आदेश और उसके लागू होने की स्थिति स्पष्ट होने के बाद ही तय किया जा सकेगा।
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