नई दिल्ली, 25 जून 2026 (IndustrialPunch Desk) : घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में गुरुवार को सोने और चांदी की कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिला। अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में संभावित बढ़ोतरी की आशंका, मजबूत अमेरिकी डॉलर और भू-राजनीतिक तनाव में कमी के कारण कीमती धातुओं पर दबाव बना रहा। हालांकि, कारोबार के दौरान दोनों धातुओं में खरीदारी भी देखने को मिली, जिससे कीमतों में आंशिक रिकवरी दर्ज की गई।
एमसीएक्स (MCX) पर अगस्त वायदा सोना 598 रुपये (0.42%) की गिरावट के साथ 1,40,672 रुपये प्रति 10 ग्राम पर खुला। पिछले कारोबारी सत्र में इसका बंद भाव 1,41,270 रुपये था। शुरुआती गिरावट के बाद निवेशकों की खरीदारी से सोना 1,41,989 रुपये के इंट्राडे उच्च स्तर तक पहुंच गया, जबकि दिन का निचला स्तर 1,40,543 रुपये रहा।
वहीं, जुलाई वायदा चांदी 2,10,308 रुपये प्रति किलोग्राम पर खुली, जो पिछले बंद भाव 2,13,075 रुपये से 2,767 रुपये (1.30%) कम थी। कारोबार के दौरान चांदी 2,10,043 रुपये तक फिसली, लेकिन बाद में जोरदार रिकवरी के साथ 2,15,950 रुपये के इंट्राडे उच्च स्तर तक पहुंच गई।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी दबाव बना रहा। कॉमेक्स (COMEX) पर सोना 3,991.80 डॉलर प्रति औंस और चांदी 57.13 डॉलर प्रति औंस के आसपास कारोबार करती रही, जहां दोनों धातुओं में गिरावट दर्ज की गई।
क्यों बढ़ा दबाव?
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, अमेरिकी डॉलर के एक साल के उच्च स्तर पर पहुंचने और सितंबर से अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में फिर से बढ़ोतरी की संभावना ने सोने-चांदी की मांग को प्रभावित किया है। इसके अलावा, अमेरिकी टेक्नोलॉजी शेयरों में आई गिरावट के बाद कुछ निवेशकों ने अन्य परिसंपत्तियों में हुए नुकसान की भरपाई के लिए बुलियन में अपनी होल्डिंग बेची, जिससे कीमतों पर अतिरिक्त दबाव आया।
विशेषज्ञों का कहना है कि मध्य-पूर्व में तनाव कम होने और कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से महंगाई को लेकर चिंता कुछ कम हुई है। अब निवेशकों की निगाह अमेरिका के आगामी महंगाई (Inflation) के आंकड़ों पर टिकी है, जिनसे फेडरल रिजर्व की अगली मौद्रिक नीति की दिशा तय हो सकती है।
कच्चे तेल में भी गिरावट
इस बीच अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भी नरमी रही। ब्रेंट क्रूड करीब 72 डॉलर प्रति बैरल और WTI क्रूड 70 डॉलर प्रति बैरल से नीचे कारोबार करता रहा।
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में अमेरिकी आर्थिक आंकड़े, डॉलर की चाल और फेडरल रिजर्व की नीति से जुड़े संकेत ही सोने-चांदी की कीमतों की अगली दिशा तय करेंगे।
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