कोलकाता 29 June (IndustrialPunch Desk) : कलकत्ता हाईकोर्ट ने भविष्य निधि (PF) और ग्रेच्युटी को लेकर एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया है कि नॉमिनी केवल राशि प्राप्त करने का माध्यम (Trustee) होता है, वास्तविक मालिक नहीं। यदि किसी कर्मचारी की मृत्यु हो जाती है, तो PF और ग्रेच्युटी पर अंतिम अधिकार उसके कानूनी उत्तराधिकारियों (Legal Heirs) का होगा, न कि केवल नॉमिनी का।
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कोल इंडिया कर्मचारियों के लिए क्यों अहम है फैसला?
कोल इंडिया और उसकी सभी अनुषंगी कंपनियों (SECL, BCCL, ECL, CCL, WCL, NCL, MCL और CMPDI) में बड़ी संख्या में ऐसे कर्मचारी हैं जिन्होंने नौकरी के शुरुआती वर्षों में अपने माता-पिता को नॉमिनी बनाया था, लेकिन विवाह के बाद नामांकन (Nomination) में संशोधन नहीं कराया।
ऐसी स्थिति में कर्मचारी की मृत्यु के बाद कई बार पत्नी, बच्चों और माता-पिता के बीच PF, ग्रेच्युटी तथा अन्य सेवा लाभों को लेकर विवाद उत्पन्न हो जाते हैं। हाईकोर्ट का यह फैसला ऐसे मामलों में महत्वपूर्ण कानूनी मार्गदर्शन देता है।
क्या कहा हाईकोर्ट ने?
नॉमिनी केवल भुगतान प्राप्त करने का माध्यम है।
नॉमिनी को राशि वास्तविक कानूनी वारिसों तक पहुंचानी होगी।
नॉमिनी होने मात्र से वह पूरी राशि का मालिक नहीं बन जाता।
PF और ग्रेच्युटी का अंतिम अधिकार उत्तराधिकार कानून के अनुसार तय होगा।
किस मामले में आया फैसला?
यह फैसला बीसीसीएल की दामागोड़िया कोलियरी के एक कर्मचारी से जुड़े मामले में आया। कर्मचारी ने नौकरी के दौरान अपनी मां को नॉमिनी बनाया था। बाद में विवाह हुआ लेकिन नामांकन में पत्नी का नाम नहीं जोड़ा गया। कर्मचारी की मृत्यु के बाद पत्नी ने ग्रेच्युटी और PF पर दावा किया, जिसे प्रारंभिक स्तर पर नकार दिया गया। लगभग 25 वर्ष की कानूनी लड़ाई के बाद हाईकोर्ट ने पत्नी और अन्य कानूनी वारिसों के पक्ष में फैसला सुनाया।
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कर्मचारियों के लिए क्या सीख?
विशेषज्ञों का कहना है कि सभी कर्मचारियों को समय-समय पर अपने PF, ग्रेच्युटी, सर्विस बुक, ई-नॉमिनेशन और अन्य सेवा अभिलेखों की समीक्षा कर आवश्यकता पड़ने पर नामांकन अपडेट कर लेना चाहिए, ताकि भविष्य में परिवार को किसी कानूनी विवाद का सामना न करना पड़े।
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