कोरबा, 29 जून। कोयला खदानों से निकलने वाला पानी अब बेकार नहीं जाएगा, बल्कि लोगों की प्यास बुझाएगा। कोल इंडिया लिमिटेड ने अपनी महत्वाकांक्षी ‘कोल नीर’ (Coal Neer) परियोजना के तहत खदानों के माइन वाटर को शुद्ध कर बोतलबंद पेयजल के रूप में उपलब्ध कराने की तैयारी पूरी कर ली है। इस परियोजना का उद्घाटन अगले तीन-चार दिनों में केंद्रीय कोयला मंत्री द्वारा किए जाने की संभावना है।
जानकारी के अनुसार, भारत कोकिंग कोल लिमिटेड (बीसीसीएल) की 46 खदानों में लगभग 1,280 लाख घनमीटर माइन वाटर उपलब्ध है। अब इस पानी को अत्याधुनिक आरओ एवं जल शोधन तकनीक से शुद्ध कर ‘कोल नीर’ ब्रांड नाम से बाजार में उतारा जाएगा। योजना के तहत 20 लीटर की बोतल मात्र ₹5 में उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है, जिससे स्थानीय लोगों को सस्ती दर पर सुरक्षित पेयजल मिल सके।
चार कोल इंडिया कंपनियों में शुरू होगी परियोजना
यह परियोजना केवल बीसीसीएल तक सीमित नहीं रहेगी। कोल इंडिया की चार प्रमुख कंपनियों—बीसीसीएल, सीसीएल, एसईसीएल और एमसीएल—में माइन वाटर बॉटलिंग प्लांट स्थापित किए गए हैं। झारखंड में 30 जून को इस महत्वाकांक्षी योजना के शुभारंभ की संभावना है।
निर्माण कार्य अंतिम चरण में
बीसीसीएल के सीएमडी श्री मनोज कुमार अग्रवाल ने पुटकी-बलिहारी क्षेत्र में निर्माणाधीन ‘कोल नीर’ आरओ वाटर बॉटलिंग प्लांट का निरीक्षण किया। उन्होंने निर्माण कार्य की प्रगति, उत्पादन तैयारियों, गुणवत्ता मानकों और संचालन व्यवस्था की समीक्षा की। इस दौरान उनके साथ निदेशक (तकनीकी/संचालन) श्री संजय कुमार सिंह, निदेशक (तकनीकी–परियोजना एवं योजना) श्री राजीव कुमार सिन्हा तथा निदेशक (वित्त) श्री राजेश कुमार भी उपस्थित रहे।
‘वेस्ट टू वेल्थ’ विज़न को मिलेगा बल
यह परियोजना प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के ‘वेस्ट टू वेल्थ’ विज़न के अनुरूप विकसित की जा रही है। इसके माध्यम से खदानों से निकलने वाले पानी का उपयोग कर सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराया जाएगा। साथ ही जल संरक्षण, पर्यावरण संरक्षण, महिला स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से महिला सशक्तिकरण तथा स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन को भी बढ़ावा मिलेगा।
बीसीसीएल के अनुसार, परियोजना का निर्माण कार्य अंतिम चरण में है और जल्द ही कोयला मंत्रालय द्वारा इसका औपचारिक उद्घाटन किया जाएगा।
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