जबलपुर/नई दिल्ली, 3 July (IndustrialPunch Desk) : कोल इंडिया (CIL) और उसकी सहायक कंपनियों के अधिकारियों के वेतन एवं सेवा संबंधी विवाद ने अब कानूनी मोड़ ले लिया है। मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय, जबलपुर ने अवमानना (Civil Contempt) से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए कोयला मंत्रालय के सचिव, कोल इंडिया लिमिटेड (CIL) के अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक (CMD) तथा निदेशक (मानव संसाधन) सहित संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी किया है।
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न्यायालय के समक्ष दायर अवमानना याचिकाओं में आरोप लगाया गया है कि पूर्व में पारित न्यायिक आदेशों का समयबद्ध एवं पूर्ण पालन नहीं किया गया। इसी आधार पर न्यायालय से अवमानना कार्यवाही शुरू करने का आग्रह किया गया है।
2 जुलाई को जारी हुआ नोटिस
उपलब्ध न्यायालयीय आदेशों के अनुसार, 2 जुलाई 2026 को न्यायमूर्ति विशाल मिश्रा की एकलपीठ ने CONC No. 4055/2026 (Himanshu Shekhar Sharma Vs. Shri Vikram Dev Dutt & Others) तथा CONC No. 4196/2026 (Tilkraj & Others Vs. Shri Vikram Dev Dutt & Others) में प्रतिवादियों को सात कार्य दिवस के भीतर प्रोसेस फीस जमा होने पर नोटिस जारी करने के निर्देश दिए हैं।
साथ ही न्यायालय ने CONC No. 4196/2026 को CONC No. 4055/2026 के साथ समान (Analogous) सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने का भी आदेश दिया है।
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किन अधिकारियों को बनाया गया प्रतिवादी
न्यायालय में प्रस्तुत दस्तावेजों के अनुसार प्रमुख प्रतिवादियों में शामिल हैं :
- विक्रम देव दत्त, सचिव, कोयला मंत्रालय, भारत सरकार
- सीआईएल के अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक (CMD)
- सीआईएल के निदेशक (मानव संसाधन)
- संबंधित सहायक कंपनी के निदेशक (मानव संसाधन) (संबंधित याचिका के अनुसार)
कई अधिकारियों ने दायर की हैं याचिकाएं
प्रकरण में विभिन्न कोयला कंपनियों के अधिकारियों द्वारा अलग-अलग अवमानना याचिकाएं दायर की गई हैं। उपलब्ध रिकॉर्ड के अनुसार इनमें SECL और MCL सहित अन्य इकाइयों के अधिकारी भी शामिल हैं। सभी याचिकाओं का संबंध सेवा एवं वेतन संबंधी विवादों से जुड़ा बताया गया है।
अब क्या होगा आगे?
नोटिस जारी होने के बाद संबंधित प्रतिवादियों को न्यायालय के समक्ष अपना जवाब प्रस्तुत करना होगा। इसके बाद अदालत यह तय करेगी कि पूर्व आदेशों के अनुपालन में कोई चूक हुई है या नहीं तथा अवमानना की कार्यवाही आगे बढ़ाई जाए या नहीं।
यह मामला कोल इंडिया और उसकी सहायक कंपनियों के अधिकारियों के बीच काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इसका प्रभाव वेतन एवं सेवा शर्तों से जुड़े अन्य मामलों पर भी पड़ सकता है।

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