कोरबा | Industrial Punch : कुसमुंडा क्षेत्र (Kusmunda Area) में साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (SECL) द्वारा किए गए भूमि अधिग्रहण को लेकर लोकसभा में उठाए गए सवाल पर केंद्र सरकार ने विस्तृत जवाब देते हुए अधिग्रहित भूमि, मुआवजा, पुनर्वास और रोजगार से जुड़े कई महत्वपूर्ण तथ्य सार्वजनिक किए हैं।
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लोकसभा में सांसद अमर राम द्वारा पूछे गए तारांकित प्रश्न के उत्तर में केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री जी. किशन रेड्डी ने बताया कि कुसमुंडा विस्तार परियोजना के लिए विभिन्न चरणों में कुल 410.09 एकड़ भूमि का अधिग्रहण किया गया।
सरकार के अनुसार भूमि अधिग्रहण अलग-अलग कानूनों और वर्षों के तहत किया गया। इसमें वर्ष 1962-63 में 10.39 एकड़, 11 जून 1964 को 55.45 एकड़, 3 जुलाई 1978 को 185.96 एकड़, तथा 27 अप्रैल 1983 को 132.49 एकड़ और 25.80 एकड़ भूमि का अधिग्रहण शामिल है।
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि 1985 में 25.80 एकड़ अतिरिक्त भूमि का मुआवजा प्रभावित भू-स्वामियों को वितरित किया गया था।
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लोकसभा में दिए गए जवाब के अनुसार, अधिग्रहित भूमि के बदले 1983 और 1985 के दौरान 209 प्रभावित परिवारों को रोजगार प्रदान किया गया। वहीं, ग्रामीणों की शिकायतों के आधार पर वर्ष 2022 में जांच कराई गई, जिसमें तीन अतिरिक्त पात्र व्यक्तियों को रोजगार देने का निर्णय लिया गया।
सरकार ने बताया कि तत्कालीन एनसीडीसी द्वारा अधिग्रहित कुछ प्लॉटों का कुल क्षेत्रफल 10.84 एकड़ था, जबकि बाद में संशोधित अभिलेखों के अनुसार कुल अधिग्रहित क्षेत्र का सत्यापन कर रिकॉर्ड सार्वजनिक किया गया है।
पुनर्वास के मुद्दे पर सरकार ने कहा कि जरहाजेल गांव की भूमि का अधिग्रहण 1960 से 1983 के बीच किया गया था तथा उस समय लागू नीतियों और नियमों के अनुसार प्रभावित परिवारों को सभी स्वीकृत लाभ प्रदान किए गए।
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यह जवाब ऐसे समय आया है जब कुसमुंडा क्षेत्र में भूमि अधिग्रहण, रोजगार और पुनर्वास को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं। संसद में प्रस्तुत आधिकारिक जानकारी ने इन मुद्दों पर सरकार का विस्तृत पक्ष सामने रखा है।
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