नई दिल्ली | Industrial Punch : देश में नई चार श्रम संहिताओं (Labour Codes) के पूर्ण क्रियान्वयन में हो रही देरी को लेकर राज्यसभा में उठाए गए सवाल पर केंद्र सरकार ने स्थिति स्पष्ट की है। सरकार ने बताया कि चारों श्रम संहिताएं 21 नवंबर 2025 से लागू हैं, जबकि इनके तहत केंद्रीय नियम 8 मई 2026 को अधिसूचित किए जा चुके हैं।
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राज्यसभा में पूछे गए एक अतारांकित प्रश्न के उत्तर में श्रम एवं रोजगार राज्य मंत्री सुश्री शोभा करंदलाजे ने कहा कि श्रम संविधान की समवर्ती सूची का विषय होने के कारण राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को भी अपने-अपने नियम बनाने आवश्यक हैं। अधिकांश राज्यों ने नियमों को अंतिम रूप दे दिया है या उनका प्रकाशन/पूर्व-प्रकाशन कर दिया है, लेकिन कुछ राज्यों में यह प्रक्रिया अभी भी जारी है।
सरकार ने स्पष्ट किया कि जिन प्रावधानों के लिए अलग से नियमों की अधिसूचना आवश्यक नहीं है, वे पहले से प्रभावी हैं। वहीं, जिन राज्यों में नए नियम बनने की प्रक्रिया पूरी नहीं हुई है, वहां पुराने कानूनों के तहत लागू नियम, अधिसूचनाएं, विनियम और योजनाएं तब तक प्रभावी रहेंगी, जब तक वे नई श्रम संहिताओं के प्रावधानों से असंगत नहीं हैं। इससे किसी भी प्रकार की कानूनी शून्यता (Legal Vacuum) उत्पन्न नहीं होगी और श्रमिकों के अधिकारों की निरंतर सुरक्षा बनी रहेगी।
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सरकार के इस जवाब से स्पष्ट है कि श्रम संहिताओं का क्रियान्वयन चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ रहा है और राज्यों में नियमों की प्रक्रिया पूरी होने के बाद पूरे देश में इनका व्यापक प्रभाव दिखाई देगा।
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