नई दिल्ली। IndustrialPunch : भारत के मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की रफ्तार अगस्त में कमजोर पड़ गई। Manufacturing Purchasing Managers’ Index (PMI) गिरकर 52.8 पर आ गया, जो पिछले करीब पांच वर्षों में विनिर्माण गतिविधियों की सबसे धीमी वृद्धि को दर्शाता है।
PMI का 50 से ऊपर रहना आम तौर पर सेक्टर में विस्तार का संकेत माना जाता है। हालांकि, अगस्त में 52.8 का स्तर बताता है कि मैन्युफैक्चरिंग गतिविधियों में विस्तार जारी रहा, लेकिन इसकी गति में उल्लेखनीय कमी आई।
पांच साल में सबसे धीमी विस्तार दर
अगस्त का PMI आंकड़ा भारतीय मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र के लिए चिंता का संकेत है। पिछले महीनों की तुलना में इंडेक्स में गिरावट से पता चलता है कि उत्पादन और कारोबारी गतिविधियों की रफ्तार पर दबाव बढ़ा है।
मैन्युफैक्चरिंग PMI को अर्थव्यवस्था में औद्योगिक गतिविधियों की दिशा का एक महत्वपूर्ण संकेतक माना जाता है। इसमें उत्पादन, नए ऑर्डर, रोजगार और कारोबारी परिस्थितियों जैसे प्रमुख पहलुओं की तस्वीर सामने आती है।
आर्थिक विकास के लिए महत्वपूर्ण संकेतक
भारत की अर्थव्यवस्था में मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की अहम भूमिका है। ऐसे में PMI में लगातार कमजोरी आने पर औद्योगिक उत्पादन, निवेश और रोजगार की रफ्तार पर भी असर पड़ सकता है।
हालांकि, PMI का 52.8 पर रहना अभी भी 50 के विस्तार स्तर से ऊपर है। इसलिए इसे मैन्युफैक्चरिंग में संकुचन नहीं, बल्कि वृद्धि की गति में कमी के रूप में देखा जाना चाहिए।
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