नई दिल्ली। IndustrialPunch : भारत के ऑटोमोबाइल सेक्टर में इलेक्ट्रिक वाहनों की बढ़ती मांग के बीच छोटे ईवी ब्रांड तेजी से विस्तार की तैयारी कर रहे हैं। सितंबर 2026 के ताजा उद्योग अपडेट के अनुसार, इलेक्ट्रिक दोपहिया बाजार में नए निर्माताओं की बिक्री बढ़ रही है। वहीं, बड़ी कंपनियां और वैश्विक वाहन निर्माता भारत को इलेक्ट्रिक वाहन निर्माण का प्रमुख केंद्र बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।
छोटे ईवी ब्रांडों की बिक्री में तेजी
Greaves Electric Mobility, River Mobility, Bgauss Auto और Simple Energy जैसे ब्रांडों ने 2026 में मजबूत बिक्री दर्ज की है। Greaves Electric Mobility ने वर्ष 2026 में अब तक 66,069 इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहन बेचे हैं। कंपनी की बिक्री पिछले पूरे वर्ष के आंकड़े को पार कर चुकी है। River Mobility और Bgauss Auto ने भी अपने पिछले वर्ष के बिक्री स्तर से आगे निकलने की जानकारी दी है।
छोटे ब्रांडों के विस्तार में घरेलू बैटरी निर्माण, कम परिचालन लागत और नए उत्पादों की उपलब्धता की भूमिका अहम मानी जा रही है। कंपनियां उत्पादन क्षमता बढ़ाने और बिक्री एवं सर्विस नेटवर्क को मजबूत करने के लिए निवेश जुटा रही हैं।
ईवी बिक्री में 53 प्रतिशत की सालाना वृद्धि
अगस्त 2026 में भारत की इलेक्ट्रिक वाहन रिटेल बिक्री में सालाना आधार पर 53 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। इलेक्ट्रिक दोपहिया और पैसेंजर व्हीकल की बढ़ती मांग ने इस वृद्धि को गति दी। हालांकि, पिछले महीने की तुलना में बिक्री में गिरावट भी दर्ज हुई, जिससे पता चलता है कि अलग-अलग वाहन निर्माताओं के प्रदर्शन में अंतर बना हुआ है।
भारत में नए निर्माण निवेश की तैयारी
इलेक्ट्रिक मोटरसाइकिल निर्माता Ultraviolette Automotive ने तमिलनाडु के होसुर में लगभग 779 करोड़ रुपये के निवेश से नया मैन्युफैक्चरिंग प्लांट लगाने की योजना बनाई है। शुरुआती चरण में संयंत्र की वार्षिक क्षमता 2.5 लाख वाहन होगी, जिसे मांग के अनुसार 5 लाख तक बढ़ाया जा सकेगा। यह निवेश कंपनी के बड़े बाजार में प्रवेश और इलेक्ट्रिक दोपहिया उत्पादन बढ़ाने की रणनीति का हिस्सा है।
भारत-केंद्रित इलेक्ट्रिक कारों पर VinFast का फोकस
वियतनाम की वाहन निर्माता VinFast भारत के लिए दो नई इलेक्ट्रिक कारों के विकास की योजना बना रही है। कंपनी VF X और VF Y नाम से भारत-केंद्रित मॉडल तैयार करने पर विचार कर रही है। इसके साथ ही भारत में उत्पादन क्षमता बढ़ाने और किफायती इलेक्ट्रिक कार बाजार में प्रतिस्पर्धा करने की तैयारी है।
ऑटो उद्योग के लिए आगे की चुनौती
ईवी बाजार के विस्तार के साथ बैटरी, मोटर और पावर इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे महत्वपूर्ण पुर्जों का स्थानीय निर्माण भी जरूरी है। उद्योग विशेषज्ञों के अनुसार, केवल वाहनों की असेंबली बढ़ाने के बजाय देश में तकनीक, इंजीनियरिंग और अनुसंधान क्षमता विकसित करना दीर्घकालीन प्रतिस्पर्धा के लिए महत्वपूर्ण होगा।
- Join the IndustrialPunch WhatsApp Group:Click here
- industrial punch is now on Whatsapp Channels. Click here to join









