नई दिल्ली। IndustrialPunch : कोल इंडिया लिमिटेड (CIL) भूमिगत और ओपनकास्ट खदानों को आधुनिक तकनीक से लैस कर स्मार्ट माइनिंग की दिशा में बड़ा बदलाव कर रही है। कोयला मंत्रालय की फैक्टशीट के अनुसार, कंपनी पारंपरिक खनन प्रक्रियाओं की जगह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT), डेटा एनालिटिक्स और ऑटोमेशन जैसी तकनीकों को तेजी से अपना रही है। इसका उद्देश्य खनन की दक्षता, सुरक्षा और स्थिरता में सुधार करना है।
AI और IoT से खदानों की निगरानी
कोल इंडिया द्वारा प्रेडिक्टिव मेंटेनेंस, ऑटोमेटेड डिस्पैच, स्मार्ट कंट्रोल रूम और बेहतर सुरक्षा व्यवस्था के लिए AI, IoT तथा डेटा एनालिटिक्स का इस्तेमाल किया जा रहा है। रिमोट सेंसिंग, GIS, LiDAR, ड्रोन और 2D/3D सीस्मिक सर्वे के माध्यम से कोयला संसाधनों का आकलन अधिक प्रभावी बनाया जा रहा है।
मशीन लर्निंग मॉडल की मदद से कोयले की सीम और भूगर्भीय आंकड़ों की व्याख्या करने की दिशा में भी काम किया जा रहा है। इससे खनन योजना, संसाधन पहचान और उत्पादन प्रक्रिया को अधिक वैज्ञानिक बनाने में मदद मिलेगी।
सुरक्षा प्रणाली में भी तकनीकी बदलाव
CIL खदानों में AI आधारित सुरक्षा प्रणालियों को मजबूत कर रही है। इनमें ऑपरेटर की थकान की निगरानी, प्रॉक्सिमिटी वार्निंग सिस्टम, 360 डिग्री कैमरे तथा ऑटोमेटिक फायर डिटेक्शन और फायर सप्रेशन सिस्टम शामिल हैं।
इसके अलावा GPS आधारित ट्रक डिस्पैच, पेलोड मॉनिटरिंग और वाहन स्वास्थ्य निगरानी प्रणाली के जरिए भारी खनन उपकरणों और परिवहन बेड़े की उपयोगिता बढ़ाई जा रही है। कंपनी ब्लास्ट-फ्री तकनीक को भी चरणबद्ध तरीके से अपना रही है। इलेक्ट्रिक डेटोनेटर की जगह अधिक सुरक्षित इलेक्ट्रॉनिक डेटोनेटर का इस्तेमाल किया जा रहा है।
भूमिगत उत्पादन को 100 मिलियन टन तक ले जाने का लक्ष्य
भूमिगत खनन के क्षेत्र में कोल इंडिया का लक्ष्य कंटीन्यूअस माइनर, लॉन्गवॉल और हाईवॉल तकनीकों के माध्यम से उत्पादन को लगभग 100 मिलियन टन तक बढ़ाना है।
कंपनी पेस्ट फिल तकनीक, बेहतर वेंटिलेशन और स्ट्राटा मैनेजमेंट पर भी निवेश कर रही है। इन तकनीकों से भूमिगत खदानों में सुरक्षा, कोयला रिकवरी और परिचालन दक्षता को बेहतर बनाने की उम्मीद है।
भविष्य में ऑटोनॉमस और लो-कार्बन माइन
भविष्य की योजना के तहत CIL ऑटोनॉमस माइनिंग उपकरण, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, 5G नेटवर्क, डिजिटल ट्विन्स और ऑटोनॉमस मॉनिटरिंग रोवर्स जैसी तकनीकों को अपनाने की दिशा में आगे बढ़ रही है।
स्मार्ट माइनिंग रणनीति के जरिए कोल इंडिया खनन क्षेत्र को अधिक सुरक्षित, कुशल, तकनीक आधारित और कम कार्बन वाला बनाने की दिशा में परिवर्तन कर रही है। कोयला मंत्रालय की पूर्व पहलों में भी 5G नेटवर्क, ड्रोन, AI कैमरा, वाहन ट्रैकिंग और रियल-टाइम मॉनिटरिंग जैसे उपयोगों पर जोर दिया गया है।
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