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नई दिल्ली, 23 जुलाई।  राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद ने सभी राजनीतिक दलों से पक्षपातपूर्ण दृष्टिकोण से ऊपर उठने और देश के लोगों के विकास और कल्याण के लिए राष्ट्र प्रथम की भावना के साथ काम करने का आह्वान किया है।

आज संसद के केंद्रीय कक्ष में आयोजित विदाई समारोह में राष्‍ट्रपति कोविंद ने कहा कि अगर हम ये समझते हैं कि समूचा देश एक परिवार की तरह है, तो कभी ना कभी मतभेद हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे मतभेदों को बातचीत के माध्‍यम से शांतिपूर्ण और सौहार्दपूर्ण माध्‍यम से सुलझाया जा सकता है।

श्री कोविंद ने कहा कि नागरिकों और राजनीतिक दलों के लिए कई संवैधानिक रास्ते खुले हैं, जिनमें विरोध भी शामिल है। उन्‍होंने कहा कि हमारे राष्ट्रपिता ने सत्याग्रह के हथियार का उसी उद्देश्य के लिए प्रयोग किया। राष्‍ट्रपति ने कहा कि नागरिकों को अपनी मांगों के लिए दबाव बनाने का अधिकार है, लेकिन इस अधिकार का प्रयोग हमेशा गांधीवादी सिद्धान्‍तों के अनुसार करना चाहिए।

राष्‍ट्रपति ने सांसदों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनके लिए राष्ट्रपति की जिम्मेदारियों का निर्वहण उनके समर्थन के बिना संभव नहीं था। श्री कोविंद ने कहा कि राष्ट्रपति के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान, उन्होंने पूरी क्षमता के साथ अपने कर्तव्यों का निर्वहण करने का प्रयास किया। राष्‍ट्रपति ने कहा कि भारत के सभी पूर्व राष्ट्रपति उनके लिए प्रेरणा स्रोत हैं।

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इस अवसर पर लोकसभा अध्‍यक्ष श्री बिड़ला ने कहा कि यह संसद के दोनों सदनों के सदस्यों के लिए गर्व का अवसर है। उन्‍होंने कहा कि राष्ट्र की ओर से हम सब राष्‍ट्रपति राम नाथ कोविंद के प्रति आभार और श्रद्धा व्यक्त करने के लिए एकत्र हुए हैं। श्री बिडला ने कहा कि भारत के राष्ट्रपति के रूप में अपने पांच वर्ष के कार्यकाल के दौरान श्री कोविंद ने इस सर्वोच्च पद का कद और सम्मान बढ़ाया है। उन्होंने कहा कि इस कारण से सभी सांसद उनका आभार व्यक्त करते हैं।

इस अवसर पर उपराष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडू, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय मंत्री और दोनों सदनों के सांसद उपस्थित थे।

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