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19 अगस्त, 2022: 2070 तक शूद्ध शून्य के लिए अपनी प्रतिबद्धता को जारी रखते हुए भारत की सबसे बड़ी एकीकृत विद्युत कंपनी एनटीपीसी लिमिटेड ने 15 अगस्त, 2022 को विद्यांचल सुपर थर्मल पावर स्टेशन (वीएसटीपीएस) पर 500 मेगावॉट कोयला आधारित पावर प्लांट (युनिट-13) के फ्लू गैस स्ट्रीम द्वारा पहली CO2 को कैप्चर किया।

प्लांट को इस तरह से डिज़ाइन किया गया है कि यह रोज़ाना 20 टन कार्बन डाई ऑक्साईड को कैप्चर करने में सक्षम है। कंपनी की यह पहल कार्बन डाई ऑक्साईड कैप्चर तकनीक को बढ़ावा देकर ‘कोयले पर आधारित हरित विद्युत के निर्माण’ को प्रोत्साहित करेगी।

इसी साईट पर एनटीपीसी ‘हरित हाइड्रोजन’ उत्पादन प्लांट की स्थापना भी कर रही है, जहां प्रतिदिन 2 टन हाइड्रोजन के उत्पादन के लिए ‘प्रोटोन एक्सचेंज मेम्ब्रेन’ इलेक्ट्रोलाइज़र्स का उपयोग किया जाएगा। इसके बाद प्रतिदिन कैप्चर की गई 20 टन कार्बन डाई ऑक्साईड और 2 टन प्रतिदिन हाइड्रोजन का उपयोग हेटरोजिनस कैटेलिटिक प्रक्रिया के माध्यम से प्रतिदिन 10 टन ‘हरित मेथेनॉल’ के उत्पादन के लिए किया जाएगा।

कार्बन डाई ऑक्साईड से मेथेनॉल के उत्पादन की इस एकीकृत परियोजना की अवधारणा और डिज़ाइन एनटीपीसी की आर एण्ड डी विंग यानि एनटीपीसी एनर्जी टेक्नोलॉजी रीसर्च अलायन्स (NETRA) द्वारा तैयार की गई है, इसे वीएसटीपीएस हरित रसायन विभाग द्वारा NETRA के सहयोग से निष्पादित किया गया है।

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एनटीपीसी की कुल इन्स्टॉल्ड क्षमता 69454 मेगावॉट है। कंपनी नए कारोबारों जैसे हरित हाइड्रोजन, अपशिष्ट-से-ऊर्जा और ई-मोबिलिटी में भी अपना विस्तार कर रही है। भारत की सबसे बड़ी विद्युत उत्पादक ने 2032 तक शुद्ध ऊर्जा घनत्व में 10 फीसदी कमी लाने का लक्ष्य तय किया है।

एनटीपीसी, ऊर्जा पर उच्च स्तरीय वार्ता के तहत अपने एनर्जी कॉम्पैक्ट लक्ष्यों की घोषणा करने वाली भारत की पहली विद्युत कंपनी है। विद्युत उत्पादन के अलावा एनटीपीसी ने स्वच्छ एवं हरित स्रोतों जैसे जल, पवन, सौर एवं हरित हाइड्रोजन समाधानों के माध्यम से विद्युत उत्पादन में भी विविधीकरण किया है। विद्युत जगत की इस दिग्गज ने विभिन्न प्रकार के कारोबार क्षेत्रों जैसे ईंधन सैल, ई-मोबिलिटी और अपशिष्ट से ऊर्जा के क्षेत्र में भी प्रवेश किया है।

 

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