Friday, May 1, 2026
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NCWA- XI : तो क्या मंत्री के दस्तखत बाद भी DPE में मामला फंसा हुआ है?, लेकिन BMS के रेड्डी जी इसे नहीं स्वीकारेंगे!

इधर, मंत्री के एमओयू पर हस्ताक्षर करने के बाद मंत्रालय द्वारा इसे डीपीई को आवश्यक कार्यवाही के लिए भेजे जाने से संदेह उत्पन्न हो रहा है।

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नई दिल्ली, 20 जून। कोयला कामगारों के 11वें वेतन समझौते के मामले नया ट्विस्ट आ गया है। कोयला मंत्रालय ने 20 जून को डिपार्टमेंट ऑफ पब्लिक इंटरप्राइजेस (DPE) को NCWA- XI के एमओयू की जानकारी देते हुए आवश्यक कार्यवाही के लिए पत्र भेजा है।

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कोयला मंत्रालय के डिप्टी सेक्रेटरी Darshan Kumar Solanki) द्वारा 20 जून को डिपार्टमेंट ऑफ पब्लिक इंटरप्राइजेस को भेजे गए पत्र में NCWA- XI के एमओयू की जानकारी दी गई है। डीपीई को बताया गया है कि 20 मई, 2023 को कोल इंडिया लिमिटेड, सिंगरेनी कोलियरीज कंपनी लिमिटेड तथा ट्रेड यूनियन प्रतिनिधियों के बीच कोल वेज एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर किए गए हैं।

इस पत्र के बाद अब सवाल उठने लगे हैं, कि क्या 19 फीसदी MGB मंजूरी का मामला अभी अटका हुआ है। 19 जून को कोयला मंत्री प्रल्हाद जोशी (Coal Minister Pralhad Joshi) ने NCWA- XI के एमओयू पर दस्तखत किए हैं। इसके पहले केन्द्रीय कोयला राज्यमंत्री तथा कोल सचिव अमृतलाला मीणा ने इस पर हस्ताक्षर किए थे। यह कहा जा रहा था कि कोयला मंत्री ने डीपीई के मुद्दे पर प्रधानमंत्री कार्यालय से सहमति प्राप्त कर ली है। दरअसल 6 जून को कोयला मंत्री ने यूनियन नेताओं से मुलाकात के दौरान इसको लेकर गंभीरता दिखाई थी और एक- दो दिन के भीतर ही इसे देख लेने की बात कही थी।

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इधर, मंत्री के एमओयू पर हस्ताक्षर करने के बाद मंत्रालय द्वारा इसे डीपीई को आवश्यक कार्यवाही के लिए भेजे जाने से संदेह उत्पन्न हो रहा है। डीपीई के कार्यालय ज्ञापन 24 नवम्बर, 2017 की बाधा बरकरार दिख रही है।

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बीएमएस के कोल प्रभारी ने डीपीई को नकारा था

भारतीय मजदूर संघ के कोल प्रभारी के. लक्ष्मा रेड्डी प्रारंभ से ही डीपीई के कार्यालय ज्ञापन को बाधा नहीं मान रहे थे। श्री रेड्डी ने कई मौकों पर इसे नकारा और कहा था कि डीपीई को लेकर कुछेक यूनियन एवं मीडिया के लोग गुमराह करने का काम कर रहे हैं। जबकि जेबीसीसीआई के गठन में ही डीपीई के कार्यालय ज्ञापन 24 नवम्बर, 2017 के प्रावधान के तहत वेतन समझौता करना निहित था। कोयला मंत्री के एनसीडब्ल्यूए- XI के एमओयू में दस्तखत करने के बाद भी इसे डीपीई को आवश्यक कार्यवाही के लिए भेजा गया है। ऐसी स्थिति में क्या बीएमएस के कोल प्रभारी लक्ष्मा रेड्डी फिर दोहराएंगे कि डीपीई कोई बाधा नहीं हैं। यदि डीपीई बाधा नहीं है तो जेबीसीसीआई के गठन में इसके प्रावधान को क्यों निहित किया गया और सीआईएल से लेकर कोयला मंत्रालय इस मुद्दे को लेकर क्यों पत्राचार कर रहा है। अब तो रेड्डी जी को जवाब देना चाहिए।

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