बिलासपुर | IndustrialPunch : SECL में लागू चेक-ऑफ सिस्टम को लेकर कोयला मजदूर पंचायत (KMP) ने प्रबंधन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। संगठन ने आरोप लगाया है कि पंजीकृत ट्रेड यूनियन होने के बावजूद उसे चेक-ऑफ सिस्टम से जुड़ी बैठकों और निर्णय प्रक्रिया से बाहर रखा जा रहा है, जबकि यह सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों और लागू नियमों के विपरीत है।
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कोयला मजदूर पंचायत के महासचिव विनय सिंह ने SECL के निदेशक (मानव संसाधन) को भेजे पत्र में कहा है कि वर्ष 2022 से चेक-ऑफ सिस्टम पर होने वाली बैठकों में संगठन को आमंत्रित नहीं किया जा रहा है। पत्र में दावा किया गया है कि 30 सितंबर 2021 के सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार यदि कोई पंजीकृत ट्रेड यूनियन और उसका सदस्य कर्मचारी लिखित प्राधिकरण देता है, तो सदस्यता शुल्क की कटौती की अनुमति दी जानी चाहिए।
KMP ने यह भी कहा कि SECL में लागू Code of Conduct के तहत मान्यता प्राप्त केंद्रीय श्रमिक संगठनों से संबद्ध ट्रेड यूनियनों को चेक-ऑफ व्यवस्था का हिस्सा माना जाता है, लेकिन संगठन को इससे अलग रखा जा रहा है। पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि Payment of Wages Act तथा Wage Code, 2019 और Wage Code Rules, 2026 में कहीं भी यह प्रावधान नहीं है कि कर्मचारी को किसी निर्धारित समय सीमा के भीतर ही सदस्यता प्राधिकरण पत्र जमा करना अनिवार्य होगा।
पत्र में SECL प्रबंधन से मांग की गई है कि यदि कोयला मजदूर पंचायत को चेक-ऑफ सिस्टम का हिस्सा माना जाता है, तो उसे इससे संबंधित सभी बैठकों, चर्चाओं और समितियों में शामिल किया जाए। साथ ही, सभी क्षेत्रों और इकाइयों को निर्देश जारी किए जाएं कि जिन कर्मचारियों ने संगठन के पक्ष में अधिकृत प्राधिकरण पत्र दिया है, उनका सदस्यता शुल्क नियमानुसार काटा जाए।
यदि कोयला मजदूर पंचायत की मांगों पर SECL प्रबंधन विचार करता है, तो कंपनी में चेक-ऑफ सिस्टम, ट्रेड यूनियन प्रतिनिधित्व और सदस्यता शुल्क कटौती की प्रक्रिया को लेकर नई बहस शुरू हो सकती है। वहीं, प्रबंधन की प्रतिक्रिया के बाद ही इस मामले की आगे की दिशा स्पष्ट होगी।
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