धनबाद (IndustrialPunch Desk) : भारत की प्रमुख कोकिंग कोल उत्पादक कंपनी बीसीसीएल (BCCL) में लगातार बढ़ते वित्तीय घाटे के बीच 12 खदानों और पैच के भविष्य पर संकट गहरा गया है। वित्त वर्ष 2025-26 में इन परियोजनाओं से 3,100 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान होने के बाद बीसीसीएल प्रबंधन ने इनके संचालन की व्यापक समीक्षा शुरू कर दी है। घाटे वाली परियोजनाओं को बंद करने, अन्य खदानों में विलय करने अथवा आउटसोर्सिंग के माध्यम से संचालित करने जैसे विकल्पों पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है।
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सूत्रों के अनुसार, जीएल लिंक्ड कॉस्ट शीट (GL Linked Cost Sheet) के विश्लेषण में बीसीसीएल की 12 परियोजनाएं लगातार भारी घाटे में पाई गई हैं। इनमें सबसे अधिक करीब 572 करोड़ रुपये का नुकसान कतरास क्षेत्र की एकेडब्ल्यूएमसी डिपार्टमेंटल ओपनकास्ट परियोजना में दर्ज किया गया है। इसके अलावा लोदना, सीवी एरिया, पीबी एरिया, डब्ल्यूजे एरिया, ब्लॉक-2, ब्लॉक-4 और ईजे एरिया की कई परियोजनाएं भी करोड़ों रुपये के घाटे में चल रही हैं।
रविवार को बीसीसीएल के सीएमडी की अध्यक्षता में आयोजित उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में इन सभी घाटे वाली परियोजनाओं पर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक में प्रत्येक परियोजना की आर्थिक व्यवहार्यता, उत्पादन क्षमता, लागत और भविष्य की संभावनाओं का मूल्यांकन किया गया। सूत्रों के मुताबिक, लगातार नुकसान देने वाली खदानों को चरणबद्ध तरीके से बंद करने, समीपस्थ परियोजनाओं में विलय करने अथवा निजी एजेंसियों के माध्यम से आउटसोर्सिंग मॉडल पर संचालित करने की रणनीति तैयार की जा रही है।
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जानकारों का कहना है कि कई परियोजनाओं में ओवरबर्डन रिमूवल (OBR) की लागत लगातार बढ़ने, अपेक्षित उत्पादन नहीं मिलने और कोयले के कमजोर उठाव के कारण प्रति टन उत्पादन लागत 4,000 से 5,000 रुपये तक पहुंच गई है। इसके विपरीत बाजार से मिलने वाला राजस्व लागत की भरपाई नहीं कर पा रहा है, जिससे ये परियोजनाएं कंपनी पर लगातार वित्तीय बोझ बनती जा रही हैं।
यदि प्रबंधन इस प्रस्ताव को अमल में लाता है, तो इसका प्रभाव केवल घाटे वाली खदानों तक सीमित नहीं रहेगा। इससे हजारों श्रमिकों, संविदा कर्मचारियों, स्थानीय रोजगार, परिवहन व्यवसाय और धनबाद के कोयला आधारित अर्थतंत्र पर भी व्यापक असर पड़ सकता है। हालांकि, श्रमिक संगठनों की प्रतिक्रिया और कर्मचारियों के पुनर्विनियोजन (Redeployment) की रणनीति भी इस पूरी प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
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फिलहाल अंतिम निर्णय की आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है, लेकिन बीसीसीएल द्वारा शुरू की गई यह समीक्षा आने वाले दिनों में कंपनी की उत्पादन नीति और संचालन व्यवस्था में बड़े बदलाव का संकेत मानी जा रही है। अब कोयला उद्योग, श्रमिक संगठनों और स्थानीय लोगों की नजर प्रबंधन के अंतिम फैसले पर टिकी हुई है।
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