बिलासपुर, 24 अगस्त। भारतीय मजदूर संघ (BMS) के कोल प्रभारी एवं जेबीसीसीआई सदस्य के. लक्ष्मा रेड्डी ने कहा कि कोयला कामगारों के वेतन समझौते में डीपीई (Department of Public Enterprises) कोई मुद्दा नहीं है।
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बीएमएस के कोल प्रभारी ने छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में मीडिया से चर्चा की। यहां वे अखिल भारतीय खदान मजदूर संघ की दो दिवसीय कार्यसमिति की बैठक में भाग लेने आए थे।
श्री रेड्डी ने किसी अन्य यूनियन का नाम लिए बगैर आरोप लगाया कि 11वें वेतन समझौते में DPE गाइडलाइन की बाधा कुछ संगठन द्वारा खड़ा किया जा रहा है। बीएमएस के कोल प्रभारी ने यह भी कहा कि 10वें वेतन समझौते के दौरान डीपीई को खारिज किया जा चुका है।
श्री रेड्डी ने कहा कि जेबीसीसीआई की बैठकों के दौरान सीआईएल प्रबंधन द्वारा एमजीबी को लेकर जो आंकड़े प्रस्तुत किए गए, इनमें विसंगतियां निकालने का काम केवल बीएमएस ने ही किया है। उन्होंने कहा कि बीएमएस कोयला कामगारों का वेतन समझौता जल्द चाहता है, लेकिन अन्य श्रमिक संगठन ऐसा नहीं चाहते हैं।
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यहां बताना होगा कि 2 अगस्त को केन्द्रीय कोयला मंत्री प्रल्हाद जोशी के साथ श्रमिक संगठनों के पदाधिकारियों की हुई बैठक में सीटू नेता डीडी रामनंदन ने डीपीई का मुद्दा उठाया था। श्री रामनंदन ने कोयला मंत्री के समक्ष कोयला कामगारों के वेतन समझौते के लिए डीपीई की गाइडलाइन को शिथिल करने की मांग रखी थी।
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