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कोरबा, 25 फरवरी। भारतीय मजदूर संघ (BMS) द्वारा रविवार (25 फरवरी) को पूरे देश में “विरोध दिवस” मनाया गया। जिला हेडक्वार्टस पर धरना, प्रदर्शन किया गया और रैली निकालते हुए प्रधानमंत्री एवं श्रम मंत्री के नाम जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपा गया। बीएमएस के जनरल सेक्रेटरी सुरेन्द्र कुमार पाण्डेय सूरजपुर में आयोजित विरोध दिवस में सम्मिलित हुए।

सुरेन्द्र कुमार पाण्डेय केंद्र और राज्य सरकारों पर अलग-अलग सेक्टर और इंडस्ट्री के वर्कर्स की लंबे समय से चली आ रही समस्याओं को हल करने के लिए दबाव डालने के उद्देश्य देशव्याप विरोध प्रदर्शन किया गया। छत्तीसगढ़ स्थित सूरजपुर जिला मुख्यालय में आयोजित प्रदर्शन में मुख्य वक्ता के तौर पर बीएमएस के अखिल भारतीय महामंत्री सुरेन्द्र कुमार पाण्डेय ने अपनी बात रखी।

मजरूल हक अंसारी, संजय सिंह (कोल फेडरेशन), श्रीमती चंदा राजवाड़े (आंगनबाड़ी), अमर सिंह (जिला अध्यक्ष, जिला-सूरजपुर) भवन निर्माण एवं कर्मकार संघ ने भी सभा को संबोधित किया। संचालन सालिक राम, जिला मंत्री भारतीय मजदूर संघ द्वारा किया गया। विरोध प्रदर्शन के बाद जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपा गया।

जनरल सेक्रेटरी सुरेन्द्र कुमार पाण्डेय ने बताया कि बीएमएस ने सरकार के सामने निरंतर कई ज़रूरी मुद्दे उठाए हैं, लेकिन जवाब ठंडा और नाकाफी रहा है। लाखों मिड-डे मील वर्कर्स और आशा वर्कर्स को अभी भी बहुत कम मानदेय मिल रहा है। पांच दशकों की सेवा के बाद भी, आंगनवाड़ी वर्कर्स को अभी भी सिर्फ स्कीम वर्कर्स माना जाता है, जबकि उन्हें लगातार बढ़ते काम के बोझ के साथ दिन में 10 घंटे से ज़्यादा काम करने के लिए मजबूर किया जाता है। महिला और बाल विकास मंत्रालय उनका मानदेय बढ़ाने में आनाकानी कर रहा है, जबकि लगातार अतिरिक्त ज़िम्मेदारियां दे रहा है। इंडस्ट्रियल रिलेशन्स कोड, 2020 और ऑक्यूपेशनल सेफ्टी, हेल्थ एंड वर्किंग कंडीशंस कोड, 2020 में वर्कर्स की चिंताओं को दूर नहीं किया जा सका है।

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सुरेन्द्र कुमार पाण्डेय ने बताया कि आठ राज्यों में नेशनल टेक्सटाइल कॉर्पोरेशन मिल्स के वर्कर्स को महामारी के बाद से सिर्फ़ 50 प्रतिशत सैलरी मिल रही है और पिछले दस महीनों से सैलरी पेंडिंग है। रांची में हैवी इंजीनियरिंग कॉर्पोरेशन के एम्प्लॉइज को पिछले 32 महीनों से सैलरी नहीं मिली है। यही हाल कई दूसरी यूनिट्स का भी है। म्च्ै-95 के तहत मिनिमम पेंशन 1,000 में कोई बदलाव नहीं हुआ है, जिससे लाखों पेंशनर्स को बहुत मुश्किल हो रही है। बैंक एम्प्लॉइज भी हफ़्ते में पाँच दिन काम करने के लिए आंदोलन करने को मजबूर हैं।

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