कोरबा, 20 जनवरी। कोयला मंत्रालय (Coal Ministry) द्वारा खदान बंदी तथा खनन उपरांत भूमि उपयोग को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से निरंतर पहल की जा रही है। इन प्रयासों का केंद्र बिंदु सामुदायिक विकास, खनन समाप्त क्षेत्रों का पुनःउपयोग तथा सतत आजीविका को बढ़ावा देना है।
हाल ही में संशोधित खदान बंदी दिशा-निर्देशों के अंतर्गत एस्क्रो निधि का 25 प्रतिशत सामुदायिक विकास हेतु तथा 10 प्रतिशत जस्ट ट्रांजिसन के लिए अनिवार्य रूप से आवंटित किए जाने का प्रावधान किया गया है। साथ ही, प्रभावी कार्यान्वयन सुनिश्चित करने के लिए खदान बंदी सलाहकार समिति के गठन का भी प्रावधान किया गया है।
इसके अतिरिक्त, कोयला मंत्रालय द्वारा सामुदायिक सहभागिता एवं विकास के लिए RECLAIM फ्रेमवर्क तथा प्रभावी खदान बंदी एवं बंदी उपरांत योजना के लिए LIVES फ्रेमवर्क जारी किए गए हैं। ये दोनों ढांचे खदानों के पुनःउपयोग हेतु एक संरचित एवं दूरदर्शी मार्गदर्शिका प्रदान करते हैं।
इसी क्रम में, कोयला एवं खान मंत्री की अध्यक्षता में जिला कलेक्टर्स के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक का आयोजन वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग माध्यम से 28 जनवरी, 2026 को अपराह्न 3:00 बजे किया जाएगा। बैठक में खदान बंदी से संबंधित नीतियों एवं हालिया विकासों पर चर्चा, खदान बंदी सलाहकार समितियों की प्रगति की समीक्षा, परियोजना प्रभावित व्यक्तियों तक लाभ समयबद्ध एवं पारदर्शी रूप से पहुंचाने हेतु कार्ययोजनाओं का विकास तथा जमीनी स्तर पर नीति कार्यान्वयन को मजबूत करने के लिए व्यावहारिक सुझावों पर विचार किया जाएगा।
यह बैठक खदान बंदी की प्रक्रिया को अधिक प्रभावी, समावेशी एवं सतत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम सिद्ध होगी।
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