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नई दिल्ली, 01 दिसम्बर (Industrial Punch Desk) : संसद के शीतकालीन सत्र में सीआईएल (CIL) के सेवानिवृत्त कोयला कामगारों की पेंशन संशोधन को लेकर सवाल पूछा गया। कोयला मंत्री ने बताया कि यूनियन के विरोध के कारण पेंशन अंशदान में वृद्धि करने के लिए बीमांकक की सिफारिश को लागू नहीं किया जा सका है।

आप के राज्यसभा सदस्य संजय सिंह ने संसद में सवाल उठाया :

(क) क्या यह सच है कि कोल माइंस पेंशन स्कीम (सीएमपीएस) 1998 के उपबंधों के अनुसार प्रत्येक तीन वर्ष में पेंशन संशोधन किया जाना आवश्यक है, यदि हाँ, तो अब तक कितनी बार पेंशन संशोधन किया गया है;

(ख) क्या यह भी सच है कि वर्ष 2005 से पूर्व सेवानिवृत्त अधिकांश कर्मचारियों को 2,000 से कम मासिक पेंशन प्राप्त हो रही है, जो वर्तमान परिस्थितियों में जीवन की मूल आवश्यकताओं के खर्च को भी पूरा करने में अत्यन्त अपर्याप्त है; और

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(ग) यदि हां, तो इस स्थिति के समाधान हेतु सरकार द्वारा उठाए गए या प्रस्तावित कदमों का ब्यौरा क्या है?

कोयला एवं खान मंत्री जी. किशन रेड्डी का संसद में जवाब :

(क) से (ग) : कोयला खान पेंशन स्कीम, 1998 एक तय अंशदान और तय लाभ स्कीम है। इस स्कीम के अंतर्गत अंशदान लाभ के अनुरूप नहीं है। कोयला खान पेंशन स्कीम, 1998 में पेंशन निधि के मूल्यांकन और समीक्षा का प्रावधान है। कोयला खान भविष्य निधि संगठन (CMPFO) के आयुक्त न्यासी बोर्ड (BoT), सीएमपीएफओ द्वारा नियुक्त किए जाने वाले बीमांकक द्वारा प्रत्येक तीसरे वर्ष में पेंशन निधि के मूल्यांकन के लिए जिम्मेदार हैं।

जब पेंशन निधि की उपलब्धता हो, तो बीमांकक की सिफारिश पर और केंद्र सरकार के अनुमोदन से बीओटी इस स्कीम के तहत देय अंशदान की दरों या स्वीकार्य किसी भी लाभ के पैमाने या उस अवधि में संशोधन कर सकता है जिसके लिए इस तरह के लाभ की अनुमति दी जा सकती है।

बीमांकिक मूल्यांकन रिपोर्ट, जो विस्तृत विश्लेषण पर आधारित होती है और निधि को संधारणीय बनाने के लिए तय लाभ के लिए तय अंशदान, पेंशनभोगियों की संख्या, सक्रिय श्रमिकों, उनके आश्रितों की संख्या आदि जैसे विभिन्न महत्वपूर्ण पहलुओं को ध्यान में रखा जाता है, को समय-समय पर बीओटी के समक्ष रखा जाता है।

तथापि, केन्द्रीय ट्रेड यूनियन प्रतिनिधियों, जो बीओटी के सदस्य भी हैं, के विरोध के कारण पेंशन अंशदान में वृद्धि करने के लिए बीमांकक की सिफारिश को कार्यान्वित नहीं किया जा सका। कोयला खान पेंशन स्कीम, 1998 दिनांक 31 मार्च, 1998 को लागू हुई और न्यूनतम मासिक पेंशन को दिनांक 08 मार्च, 2024 को संशोधित किया गया है।

दिनांक 1 अक्टूबर, 2017 से निधि में अंशदान को 4.91 प्रतिशत से संशोधित कर 14 प्रतिशत कर दिया गया था। इसके बावजूद, निधि में अंशदान संवितरण से कम है।

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