नई दिल्ली | IndustrialPunch : देश में ताप विद्युत संयंत्रों के लिए कोयले के आयात में पिछले दो वर्षों के दौरान 30.9% की गिरावट दर्ज की गई है। केंद्र सरकार ने राज्यसभा में बताया कि 2023-24 में 65.7 मिलियन टन रहा कोयला आयात घटकर 2025-26 में 45.4 मिलियन टन रह गया। सरकार का कहना है कि घरेलू उत्पादन बढ़ने से आयात पर निर्भरता कम हुई है और इसका बिजली उत्पादन पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ा।
बिजली उत्पादन पर नहीं पड़ा असर
सरकार ने स्पष्ट किया कि कोयले के आयात में कमी के बावजूद देश में बिजली की मांग के अनुरूप उत्पादन होता रहा। 2025-26 में अपेक्षित और उपलब्ध कराई गई ऊर्जा के बीच अंतर लगभग 0.0% रहा, जबकि 2026-27 (जून तक) यह अंतर 0.1% है।
घरेलू उत्पादन पर सरकार का फोकस
सरकार ने कहा कि देश की अधिकांश कोयला आवश्यकता घरेलू उत्पादन से पूरी की जा रही है। 2024-25 में देश का अब तक का सर्वाधिक 1,047.67 मिलियन टन कोयला उत्पादन दर्ज किया गया, जो 2023-24 की तुलना में लगभग 5% अधिक था।
बिजलीघरों में पर्याप्त कोयला भंडार
सरकार के अनुसार, 13 जुलाई 2026 तक घरेलू कोयला आधारित ताप विद्युत संयंत्रों में 39.09 मिलियन टन कोयला उपलब्ध था।
यह मौजूदा खपत के आधार पर लगभग 14 दिनों तक बिजलीघरों को 85% PLF पर चलाने के लिए पर्याप्त है।
31 मार्च 2026 तक Coal India और अन्य कंपनियों की खदानों में 151.96 मिलियन टन कोयले का भंडार उपलब्ध था।
आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए क्या कर रही है सरकार?
सरकार ने बताया कि बिजली, कोयला और रेल मंत्रालय, CEA, Coal India तथा SCCL के प्रतिनिधियों वाला अंतर-मंत्रालयी उप-समूह नियमित बैठकें कर रहा है। यह समिति कोयले की उपलब्धता, रेलवे रेक आवंटन और बिजलीघरों तक समय पर आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए लगातार निगरानी कर रही है।
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