कोरबा, 09 जुलाई। 10 केन्द्रीय श्रमिक संगठनों द्वारा आयोजित देशव्यापी आम हड़ताल (Strike) का कोल सेक्टर पर असर देखने को मिल रहा है। इधर, एसईसीएल (SECL) में हड़ताल लगभग 80 फीसदी सफल बताई गई है। कोयला उत्पादन और प्रेषण प्रभावित हुआ है।
चार लेबर कोड निरस्त करने सहित केन्द्र की श्रमिक विरोधी नीतियों के खिलाफ 17 सूत्रीय मांगो को लेकर पब्लिक सेक्टर सहित बैंकिंग, इंश्योरेंस, पोस्टल, हाईवे, कंस्ट्रक्शन, स्टेट ट्रांसपोर्ट आदि प्रतिष्ठानों के कर्मचारी कामबंद हड़ताल पर रहेंगे। किसान संगठन भी हड़ताल का समर्थन कर रहे हैं। बताया गया है 25 से 30 करोड़ कर्मचारी हड़ताल पर हैं।

इधर, कोल सेक्टर में हड़ताल का असर पड़ा है। एसईसीएल के श्रमिक संगठनों से जो आंकड़े मिल रहे हैं, इसके अनुसार हड़ताल 80 फीसदी सफल है। एसईसीएल के कुछ क्षेत्रों में तो हड़ताल शत प्रतिशत सफल रही है।
एचमएस नेता एससी मंसूरी ने बताया कि गेवरा माइंस में सुबह से कोयला उत्पादन नहीं हुआ है और डिस्पैच भी प्रभावित हुआ है। कोल स्टॉक से ही डिस्पैच हो सका है।

सीटू के वरिष्ठ नेता वीएम मनोहर ने बताया कि एसईसीएल में हड़ताल 80 फीसदी सफल रही है। नियमित के साथ ही ठेका कामगारों ने भी हड़ताल को सपोर्ट किया है। उन्होंने बताया कि कुसमुंडा क्षेत्र मेंं उत्पादन पर असर पड़ा है।
इंटक नेता गोपाल नारायण सिंह ने कहा कि हड़ताल को अच्छा प्रतिसाद मिला है। कोल सेक्टर के बड़े मुद्दे हड़ताल के एजेण्डा में नहीं होने के बावजूद कोयला कामगारों ने इसका समर्थन किया है। यह हड़ताल चार लेबर कोड के प्रति आक्रोश को दर्शाती है।

यूनियन के अनुसार एसईसीएल में क्षेत्रवार हड़ताल की स्थिति :
- बैकुंठपुर : 100%
- जोहिला : 100%
- हसदेव : 100%
- चिरमिरी : 80%
- बिश्रामपुर : 80%
- सोहागपुर : 70%
- गेवरा : 90%
- दीपका : 45%
- कुसमुंडा : 70%
- भटगांव : 80%
- जमुना कोतमा : 56%
- रायगढ़ : 90%
- कोरबा : 95%
- एसईसीएल मुख्यालय : 40%
- केन्द्रीय कर्मशाला कोरबा : 15%
- केन्द्रीय कर्मशाला गेवरा : 10%
प्रबंधन ने कहा- हड़ताल का मिलाजुला असर, 51% उपस्थिति रही
एसईसीए प्रबंधन की मानें तो हड़ताल के कारण कामगारों उपस्थित जनरल और प्रथम पाली में 50 प्रतिशत रही है। जनसंपर्क अधिकारी सनीश चन्द्रा ने बताया कि राष्ट्रव्यापी हड़ताल का एसईसीएल में मिला जुला असर रहा। लगभग 12 हजार कर्मचारी हड़ताल में रहे हैं। आज सुबह एसईसीएल की कुल 20 खुली खदानों में से 15 खदानें सामान्य रूप से संचालित रही थीं वहीं 4 खदानें आंशिक रूप से प्रभावित रही । भूमिगत खदानों में अपेक्षित रूप से असर देखा गया जहां 37 खदानों में से 28 खदानों में सामान्य रूप से कार्य किया गया या आंशिक रूप से प्रभावित रही। पहली पाली में कंपनी ने 87,197 टन कोयले का उत्पादन किया जो कि कल के पहली पाली के उत्पादन (85,419) से अधिक था । ओबीआर का निष्कासन 181970 मिलियन क्यूबिक मीटर रहा जो कल पहली पाली के 1,32,433 MCuM से अधिक है ।









