नई दिल्ली (IndustrialPunch Desk) : भारत का इस्पात (Steel Sector) उद्योग मई 2026 में भी मजबूत प्रदर्शन करता रहा। देश में बुनियादी ढांचा (इन्फ्रास्ट्रक्चर) परियोजनाओं, निर्माण गतिविधियों और घरेलू मांग में बढ़ोतरी के चलते स्टील उत्पादन में लगातार सुधार देखने को मिला। हालांकि, ऊर्जा क्षेत्र के कुछ प्रमुख उद्योगों के कमजोर प्रदर्शन के कारण आठ प्रमुख कोर सेक्टरों की कुल वृद्धि दर धीमी रही, लेकिन स्टील सेक्टर ने लगभग 5 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि दर्ज कर अपनी मजबूती साबित की।
स्टील सेक्टर ने संभाली कोर इंडस्ट्री की रफ्तार
सरकार द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार मई 2026 में भारत के आठ प्रमुख कोर उद्योगों की वृद्धि दर घटकर 0.5 प्रतिशत रह गई। इसके बावजूद स्टील, सीमेंट और बिजली क्षेत्र ने सकारात्मक प्रदर्शन करते हुए औद्योगिक गतिविधियों को सहारा दिया। स्टील उत्पादन में लगभग 5 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, जो इस क्षेत्र में लगातार बनी हुई मांग का संकेत है।
घरेलू मांग बनी सबसे बड़ी ताकत
विशेषज्ञों का मानना है कि केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा सड़क, रेलवे, मेट्रो, आवास और अन्य आधारभूत ढांचा परियोजनाओं पर लगातार निवेश के कारण स्टील की मांग मजबूत बनी हुई है। ऑटोमोबाइल, इंजीनियरिंग और कैपिटल गुड्स उद्योगों से भी इस्पात की खपत में वृद्धि दर्ज की जा रही है।
आयात पर सरकार की नजर
भारत सरकार स्टील आयात, विशेषकर चीन से आने वाले सस्ते इस्पात उत्पादों पर लगातार निगरानी बनाए हुए है। हाल के महीनों में भारत तैयार स्टील का शुद्ध आयातक बना हुआ है। सरकार ने संकेत दिए हैं कि अगले कुछ महीनों तक आयात की स्थिति का आकलन किया जाएगा और आवश्यकता पड़ने पर अतिरिक्त व्यापारिक सुरक्षा उपायों पर विचार किया जा सकता है।
उद्योग के लिए सकारात्मक संकेत
स्टील उद्योग का यह प्रदर्शन ऐसे समय में आया है जब कोयला, कच्चा तेल, प्राकृतिक गैस और रिफाइनरी उत्पादों के उत्पादन में गिरावट दर्ज की गई है। इसके बावजूद स्टील क्षेत्र की स्थिर वृद्धि यह दर्शाती है कि भारत में औद्योगिक और निर्माण गतिविधियां मजबूत बनी हुई हैं तथा आने वाले महीनों में भी इस क्षेत्र से बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद की जा रही है।
विशेषज्ञों की राय
विशेषज्ञों के अनुसार यदि घरेलू मांग इसी प्रकार बनी रहती है और सरकार का पूंजीगत व्यय (Capital Expenditure) जारी रहता है, तो वित्त वर्ष 2026-27 के दौरान भारतीय इस्पात उद्योग बेहतर वृद्धि दर्ज कर सकता है। हालांकि, वैश्विक बाजार में कीमतों में उतार-चढ़ाव, कच्चे माल की लागत और आयात प्रतिस्पर्धा पर नजर रखना आवश्यक होगा।
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