कोरबा | Industrial Punch : इंडियन नेशनल ट्रेड यूनियन कांग्रेस (INTUC) के अंदर चल रहे लंबे विवाद में सुप्रीम कोर्ट ने महत्वपूर्ण हस्तक्षेप किया है। सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हाईकोर्ट के 23 अप्रैल 2026 के आदेश पर फिलहाल रोक लगा दी है। हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्रालय की ओर से दायर एसएलपी पर सुनवाई करते हुए शीर्ष अदालत ने यह अंतरिम आदेश दिया।
मामला इंटक के संजीवा रेड्डी गुट से जुड़े आंतरिक विवाद और संगठन के प्रतिनिधित्व से संबंधित है। यह विवाद दिल्ली हाईकोर्ट में लंबित रिट याचिका क्रमांक 447/2017 से जुड़ा हुआ है।
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
सुप्रीम कोर्ट में न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति चंद्रशेखर की पीठ ने मामले की सुनवाई की। अदालत ने प्रतिवादी को नोटिस जारी करते हुए चार सप्ताह के भीतर काउंटर एफिडेविट दाखिल करने का निर्देश दिया है। इसके बाद मामले की सुनवाई आगे बढ़ेगी।
दिल्ली हाईकोर्ट ने 23 अप्रैल, 2026 को केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्रालय के 4 जनवरी, 2017 के पत्र को निरस्त कर दिया था। उक्त पत्र में इंटक के आंतरिक विवाद के अदालत में लंबित रहने तक मंत्रालय की बैठकों तथा द्विपक्षीय एवं त्रिपक्षीय समितियों में इंटक को प्रतिनिधित्व नहीं देने की बात कही गई थी। अब हाईकोर्ट के इसी आदेश पर सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल रोक लगा दी है।
इंटक के अंदर लंबे समय से चल रहा विवाद
इंटक के अंदर नेतृत्व और प्रतिनिधित्व को लेकर विवाद लंबे समय से न्यायिक प्रक्रिया में है। इसी विवाद के चलते केंद्रीय स्तर पर इंटक के प्रतिनिधित्व को लेकर भी स्थिति प्रभावित होती रही है।
सुप्रीम कोर्ट के अंतरिम आदेश के बाद इस पूरे मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया पर नजर बनी हुई है। शीर्ष अदालत में अगली सुनवाई 7 अगस्त 2026 को होने की बात समाचार में दर्ज है।
कोयला उद्योग पर भी पड़ सकता है असर
इंटक देश के कोयला उद्योग में प्रमुख ट्रेड यूनियनों में शामिल है। ऐसे में संगठन के प्रतिनिधित्व से जुड़ा यह विवाद कोयला क्षेत्र में श्रमिक प्रतिनिधित्व और औद्योगिक संबंधों की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
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