नई दिल्ली। IndustrialPunch : भारत के कोयला क्षेत्र में वर्ष 2014 के बाद नीति एवं संरचनात्मक सुधारों के चलते बड़ा बदलाव देखने को मिला है। पारदर्शिता, दक्षता, तकनीक के इस्तेमाल, बुनियादी ढांचे के विकास, संचालन में सुगमता और ऊर्जा सुरक्षा पर केंद्रित इन सुधारों ने कोयला उत्पादन, लॉजिस्टिक्स और खनन कार्यों में तेजी लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इसी बदलाव का परिणाम है कि भारत ने निर्धारित समय से पहले 1 बिलियन टन घरेलू कोयला उत्पादन का महत्वपूर्ण पड़ाव हासिल किया।
इस परिवर्तन की प्रमुख सफलता की कहानियों में महानदी कोलफील्ड्स लिमिटेड (MCL) का नाम प्रमुखता से सामने आता है। वर्ष 1992-93 में महज 23 मिलियन टन (MT) उत्पादन से शुरुआत करने वाली MCL आज देश की सबसे बड़ी कोयला उत्पादक कंपनी बन चुकी है। कंपनी लगातार तीन वर्षों से 200 MT से अधिक उत्पादन और डिस्पैच का स्तर बनाए हुए है। वित्त वर्ष 2021-22 से 2025-26 के दौरान MCL की उत्पादन वृद्धि लगभग 9 प्रतिशत CAGR रही, जबकि 1992-93 से 2020-21 के बीच यह दर 6.7 प्रतिशत थी।
रिकॉर्ड उत्पादन के साथ मुनाफे में भी मजबूती
MCL की उपलब्धि केवल उत्पादन और डिस्पैच तक सीमित नहीं है। कंपनी ने अपना अब तक का सर्वाधिक लाभ दर्ज किया है और Coal India Limited (CIL) के मुनाफे में प्रमुख योगदानकर्ताओं में बनी हुई है। इसके साथ ही कंपनी सरकारी खजाने में भी महत्वपूर्ण योगदान दे रही है।
MCL की गतिविधियों से बड़े पैमाने पर प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार एवं आजीविका के अवसर पैदा हो रहे हैं। कंपनी में 22,000 से अधिक नियमित कर्मचारी और 27,000 से अधिक संविदा कर्मी कार्यरत हैं। इसके अलावा परिवहन और अन्य संबद्ध गतिविधियों से जुड़ा एक व्यापक आर्थिक तंत्र भी कंपनी के इर्द-गिर्द विकसित हुआ है।
संविदा कर्मियों के लिए वेतन और सामाजिक सुरक्षा
MCL से जुड़े संविदा कर्मियों को हाई पावर कमेटी की सिफारिशों के अनुरूप वेतन का लाभ मिलता है, जो निर्धारित न्यूनतम मजदूरी से अधिक है। इसके साथ ही CMPF, चिकित्सा सुविधा और शिक्षा सहायता जैसी सामाजिक सुरक्षा एवं कल्याणकारी व्यवस्थाएं भी उपलब्ध हैं।
CLAMP पोर्टल के माध्यम से संविदा श्रमिकों से जुड़े आंकड़ों और मानव संसाधन का डिजिटल प्रबंधन किया जा रहा है। इससे व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने में मदद मिली है।
स्थानीय समुदायों को रोजगार के साथ-साथ कोयला लोडिंग और परिवहन में सहकारी समितियों की भागीदारी तथा परियोजना प्रभावित लोगों के लिए विभिन्न सहायता उपायों का लाभ मिल रहा है।
CSR के जरिए स्वास्थ्य और शिक्षा पर बड़ा जोर
MCL सामुदायिक विकास और CSR के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। कंपनी ओडिशा में प्रमुख CSR योगदानकर्ताओं में शामिल है। स्वास्थ्य, शिक्षा, पेयजल, पोषण, खेल, कौशल विकास और ग्रामीण बुनियादी ढांचे से जुड़े अनेक क्षेत्रों में CSR परियोजनाएं संचालित की जा रही हैं।
तालचेर में मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल का निर्माण लगभग ₹500 करोड़ के निवेश से किया गया है। इसके संचालन के लिए लगभग ₹60–80 करोड़ वार्षिक वित्तीय सहायता भी जारी है। संस्थान को PG पाठ्यक्रमों के लिए भी मंजूरी मिल चुकी है।
इसी तरह MCL के CSR सहयोग से झारसुगुड़ा में पहला सरकारी कार्डियक-केयर अस्पताल स्थापित किया गया है। कंपनी के कमांड क्षेत्र और आकांक्षी जिलों में पाइप्ड पेयजल परियोजनाओं के अलावा AIIMS भुवनेश्वर, बुर्ला मेडिकल कॉलेज, स्कूलों, स्मार्ट क्लास, बालिका छात्रावास और खेल परिसरों जैसी परियोजनाओं को भी सहयोग दिया गया है।
99 फीसदी से अधिक उत्पादन Surface Miner से
MCL के परिवर्तन में तकनीक और पर्यावरणीय प्रबंधन की भी बड़ी भूमिका है। कंपनी का 99 प्रतिशत से अधिक कोयला उत्पादन Surface Miner तकनीक के माध्यम से हो रहा है। इससे ड्रिलिंग, ब्लास्टिंग, क्रशिंग, धूल और अन्य पर्यावरणीय प्रभावों को कम करने में मदद मिलती है।
कंपनी 19 First Mile Connectivity (FMC) परियोजनाओं पर करीब ₹10,000 करोड़, रेल इंफ्रास्ट्रक्चर पर लगभग ₹6,500 करोड़ और कंक्रीट आंतरिक परिवहन सड़कों एवं कोल कॉरिडोर पर लगभग ₹2,150 करोड़ निवेश कर रही है।
इन परियोजनाओं का उद्देश्य कोयला निकासी को अधिक प्रभावी बनाना, सड़क परिवहन पर निर्भरता घटाना और लॉजिस्टिक्स के पर्यावरणीय प्रभाव को कम करना है। MCL के कुल डिस्पैच का लगभग 70 प्रतिशत रेल मार्ग से किया जा रहा है।
Rail-Sea-Rail मॉडल से मजबूत हुई सप्लाई चेन
MCL का Rail-Sea-Rail (RSR) मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक्स सिस्टम भी कोयला आपूर्ति को अधिक प्रभावी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। इसके माध्यम से तटीय क्षेत्रों में स्थित उपभोक्ताओं तक कोयले की विश्वसनीय और बेहतर तरीके से आपूर्ति सुनिश्चित करने का प्रयास किया जा रहा है।
पर्यटन और विरासत विकास में भी भागीदारी
MCL का योगदान खनन और औद्योगिक गतिविधियों तक सीमित नहीं है। कंपनी हिराकुड, माइन म्यूजियम, वाटरफ्रंट डेवलपमेंट, रोपवे और IB Valley स्थित Orient Mine में माइन टूरिज्म जैसी पर्यटन एवं विरासत विकास पहलों में भी योगदान दे रही है।
सामुदायिक सहभागिता बढ़ाने के लिए भुवनेश्वर हाफ मैराथन में करीब 6,000 प्रतिभागियों और हिराकुड-संबलपुर हाफ मैराथन में 10,000 से अधिक प्रतिभागियों की भागीदारी भी दर्ज की गई।
16 राज्यों में कोयले की आपूर्ति
आज MCL देश के 16 राज्यों में बिजली उत्पादन कंपनियों, Captive और Independent Power Plants, सीमेंट, स्पंज आयरन तथा अन्य औद्योगिक इकाइयों को कोयले की आपूर्ति कर रही है।
MCL की यह प्रगति भारत की ऊर्जा सुरक्षा और औद्योगिक विकास के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
कंपनी की यात्रा यह दर्शाती है कि कोयला क्षेत्र के सुधारों की सफलता को केवल उत्पादित कोयले की मात्रा से नहीं मापा जा सकता। इसमें उत्पादकता, लाभप्रदता, बेहतर लॉजिस्टिक्स, तकनीकी आधुनिकीकरण, पर्यावरणीय जिम्मेदारी, श्रमिक कल्याण, सामुदायिक विकास और राष्ट्र निर्माण जैसे पहलू भी शामिल हैं।
भारत के विकसित और ऊर्जा-सुरक्षित अर्थव्यवस्था की दिशा में आगे बढ़ने के बीच MCL उत्पादन और आपूर्ति को अधिक कुशल एवं जिम्मेदार तरीके से बढ़ाने तथा अपने कर्मचारियों, समुदायों, उपभोक्ताओं और देश तक विकास का लाभ पहुंचाने के लिए इस गति को आगे बढ़ाने पर जोर दे रही है।
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