
केंद्र सरकार ने निजी इस्तेमाल वाली कैप्टिव खदानों (captive coal mines) से उत्पादित कोयले और लिग्नाइट की बिक्री पर मौजूदा 50 फीसदी की सीमा को हटाने का प्रस्ताव दिया है। इस कदम का मकसद जमा स्टॉक को खत्म करना और बाजार में खनिज की उपलब्धता बढ़ाना है।
यह कोयला मंत्रालय (Coal Ministry) द्वारा खान और खनिज विकास एवं विनियमन (एमएमडीआर) अधिनियम में संशोधनों के माध्यम से सुधार की दिशा में उठाए जा रहे कदम का हिस्सा है।
मौजूदा प्रावधानों के तहत निजी जरूरत वाले खदान संचालकों को अपने संयंत्रों में इस्तेमाल की जरूरतों को पूरा करने के बाद अपने वार्षिक कोयले या लिग्नाइट के उत्पादन का केवल 50 फीसदी तक बेचने की अनुमति है।
मंत्रालय ने कहा, ’ऐसे खनिजों की बिक्री से जिला खनिज फाउंडेशन और राष्ट्रीय खनिज अन्वेषण ट्रस्ट को मिलने वाली रॉयल्टी आनुपातिक रूप से बढ़ सकती है। इससे खनिज वाले राज्यों की वित्तीय स्थिति मजबूत हो सकती है।’
इसमें कहा गया है कि प्रस्तावित संशोधन से न केवल आपूर्ति बढ़ेगी और किल्लत दूर होगी, बल्कि कीमतों को स्थिर करने और औद्योगिक एवं बुनियादी ढांचा संबंधी जरूरतों को पूरा करने में भी मदद मिल सकती है। इससे आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिलेगा और आयात पर निर्भरता कम होगी।
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source : Business Standard








