देश के दस केंद्रीय ट्रेड यूनियनों (इंटक, एटक, एचएमएस, सीटू, एआईयूटीयूसी, टीयूसीसी, सेवा, एआईसीसीटीयू, एलपीएफ, यूटीयूसी) तथा अन्य संगठनों के मंच ने चार लेबर कोड (four labour codes) लागू करने के विरोध में 26 नवंबर को आंदोलन करने का ऐलान किया है।
जारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि सेंट्रल ट्रेड यूनियनों का जॉइंट प्लेटफॉर्म मज़दूर-विरोधी, मालिक-समर्थक लेबर कोड को एकतरफ़ा लागू करने की कड़ी निंदा करता है। श्रमिक संगठनों ने इसे केंद्र सरकार का देश के मेहनतकश लोगों के साथ किया गया धोखा करार दिया है।
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सेंट्रल ट्रेड यूनियन्स जॉइंट प्लेटफॉर्म ने 13 नवंबर को श्रम शक्ति नीति 2025 के ड्राफ्ट पर मिनिस्ट्री की मीटिंग में भी तुरंत इंडियन लेबर कॉन्फ्रेंस (ILC) बुलाने और लेबर कोड खत्म करने की मांग की थी। यहां तक कि 20 नवंबर को फाइनेंस मिनिस्ट्री की प्री-बजट कंसल्टेशन मीटिंग में भी ट्रेड यूनियन्स के जॉइंट प्लेटफॉर्म की तरफ से लेबर कोड खत्म करने और ILC बुलाने की मांग की गई थी, जो 2015 के बाद से नहीं हुई है। सरकार ने इस पर कोई ध्यान नहीं दिया।
इसके बजाय, सेंट्रल ट्रेड यूनियनों की किसी भी अपील, विरोध और हड़ताल पर ध्यान दिए बिना, इस केंद्र सरकार ने बजट से पहले हुई सलाह-मशवरे वाली मीटिंग में मालिकों के नुमाइंदों और बीएमएस और सरकार के दूसरे छोटे समर्थकों की मांगों को पूरा करने के लिए लेबर कोड लागू कर दिए हैं।


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