नई दिल्ली। IndustrialPunch : सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (PSBs) में Performance Linked Incentive (PLI) को लेकर बैंक कर्मचारियों की आपत्तियों के बाद केंद्र सरकार ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए अधिकारियों के PLI भुगतान को फिलहाल रोकने का फैसला किया है। इस मुद्दे पर अब चल रही द्विपक्षीय समझौता (Bipartite Settlement)/Joint Note वार्ता के दौरान पुनर्विचार किया जाएगा।
केंद्रीय वित्त मंत्री ने 7 सितंबर 2026 को विभिन्न सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के बैंक कर्मचारियों के प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात की। भारतीय मजदूर संघ (BMS) के नेतृत्व में पहुंचे प्रतिनिधिमंडल ने बैंकिंग क्षेत्र से जुड़े कई मुद्दे उठाए। इनमें एक्स-ग्रेशिया की समीक्षा, सेवानिवृत्त कर्मचारियों के लिए चिकित्सा सुविधा, मौजूदा PLI व्यवस्था में बदलाव और कर्मचारियों से जुड़े अन्य विषय शामिल थे।
19 नवंबर 2024 की PLI व्यवस्था पर लगी रोक
वित्त मंत्रालय के वित्तीय सेवा विभाग द्वारा 7 सितंबर 2026 को जारी पत्र के अनुसार, 19 नवंबर 2024 को जारी PLI योजना के तहत वित्त वर्ष 2025-26 के लिए सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के अधिकारियों को PLI भुगतान को अगले आदेश तक अबेयांस (Abeyance) में रखने का निर्णय लिया गया है।
पत्र में कहा गया है कि यह मामला चल रही 13वीं द्विपक्षीय समझौता/10वीं Joint Note वार्ता के दौरान उठाया जाएगा और उसी प्रक्रिया के तहत आगे निर्णय लिया जाएगा।
यह निर्देश भारतीय स्टेट बैंक और सभी राष्ट्रीयकृत बैंकों के चेयरमैन/प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारियों को भेजा गया है।
कर्मचारियों की आपत्तियों को सरकार ने लिया संज्ञान में
सरकार के मुताबिक, बैंक कर्मचारियों की ओर से PLI संरचना को लेकर प्राप्त प्रतिनिधित्व और उठाई गई चिंताओं को संज्ञान में लिया गया। इसके बाद FY 2025-26 के लिए PLI के क्रियान्वयन को फिलहाल रोकने का निर्णय हुआ है।
वित्त मंत्रालय ने कहा है कि बैंक कर्मचारियों, ग्राहकों और पूरे बैंकिंग क्षेत्र के व्यापक हित में मुद्दों का समाधान संवाद, परामर्श और आपसी समझ के माध्यम से करने के लिए सरकार प्रतिबद्ध है।
PLI क्या है?
Performance Linked Incentive (PLI) एक प्रदर्शन आधारित प्रोत्साहन व्यवस्था है, जिसमें निर्धारित प्रदर्शन मानकों के आधार पर पात्र अधिकारियों/कर्मचारियों को अतिरिक्त प्रोत्साहन दिया जाता है। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में इस व्यवस्था को लेकर कर्मचारी संगठनों की ओर से आपत्तियां उठाई गई थीं।
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