कोरबा, 22 मार्च (Industrial Punch Desk) : कोल इंडिया (CIL) की दूसरी बड़ी कंपनी साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (SECL) उत्पादन का नया रिकार्ड कायम कर पाएगी या नहीं इसको लेकर संशय बना हुआ है। कंपनी उत्पादन को लेकर संघर्ष कर रही है।
चार साले पहले तक एसईसीएल कोल इंडिया लिमिटेड की सबसे बड़ी कंपनी हुआ करती थी। 2021- 22 से यह ओहदा महानदी कोलफील्ड्स लिमिटेड ने हासिल कर लिया है। एमसीएल न केवल टॉप पर पहुंची, बल्कि 200 मिलियन टन कोयला उत्पादन करने वाली पहली कंपनी भी बन गई।
इधर, 2024- 25 से एसईसीएल के समक्ष भी 200 मिलियन टन से अधिक कोयला उत्पादन का लक्ष्य है, लेकिन कंपनी इस आंकड़े तक नहीं पहुंच पा रही है। चालू वित्तीय वर्ष में कंपनी को 212 मिलियन टन कोयला उत्पादन का टारगेट मिला हुआ है। 21 मार्च, 2026 की स्थिति में एसईसीएल का उत्पादन 169.75 मिलियन टन पर पहुंचा है।
2023- 24 में कंपनी ने सर्वाधिक 187.37 मिलियन टन कोयला उत्पादन दर्ज किया था। माना जा रहा है कि कंपनी 31 मार्च तक इस आकंड़े को पार कर लेगी। दूसरी ओर 31 मार्च तक कंपनी का उत्पादन आंकड़ा 200 मिलियन टन तक पहुंचेगा या नहीं इसको संशय की स्थिति है। यदि 200 मिलियन टन के आंकड़े तक कंपनी नहीं पहुंचती है तो लगातार तीसरे साल भी इसमें चूक होगी।
कुसमुंडा खदान का माइनस ग्रोथ बना बाधा
चालू वित्तीय वर्ष के 21 मार्च तक की स्थिति में एसईसीएल का उत्पादन आंकड़ा 169.75 मिलियन टन तक पहुंच गया है। इसमें 120.65 मिलियन टन का योगदान तीन मेगा प्रोजक्ट्स गेवरा, कुसमुंडा और दीपका का है। इधर, कुसमुंडा खदान एसईसीएल के लिए कमजोर कड़ी साबित हो रही है। इस खदान का माइनस ग्रोथ कंपनी के उत्पादन को 200 मिलियन टन तक पहुंचाने में बाधा बना हुआ है। कुसमुंडा खदान के समक्ष 50 मिलियन टन का लक्ष्य है। 21 मार्च तक इस खदान से 31.18 मिलियन टन उत्पादन दर्ज किया गया है।
उत्पादन में निरंतरता की कमी
बीते पांच साल का रिकार्ड देखें तो एसईसीएल के उत्पादन में निरंतरता नहीं है। ऐसे में प्रबंधन की कार्यशैली पर सवाल उठते हैं।
पांच साल के उत्पादन के आंकड़े (MT में)
- 2024- 25 : 167.49
- 2023- 24 : 187.38
- 2022- 23 : 167.06
- 2021- 22 : 142.51
- 2020- 21 : 150.60
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