Saturday, August 15, 2026
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SECL में Workers’ Inspector व्यवस्था खत्म: कोयला मजदूरों की सुरक्षा पर क्या पड़ेगा असर? जानिए नए नियमों का पूरा मतलब

OSHWC Rules-2026 लागू होने के बाद बदली व्यवस्था, ट्रेड यूनियनों की भूमिका और सुरक्षा निगरानी पर उठे कई सवाल

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कोरबा, 12 जुलाई। (IndustrialPunch Desk) : साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (SECL) द्वारा जारी एक हालिया आदेश ने कोयला क्षेत्र में एक नई बहस छेड़ दी है। कंपनी ने स्पष्ट किया है कि Occupational Safety, Health and Working Conditions (OSHWC) (Central) Rules, 2026 लागू होने के बाद Workers’ Inspector (WI) की व्यवस्था और Form-U निरीक्षण रिपोर्ट की अनिवार्यता समाप्त हो गई है। यह बदलाव केवल एक प्रशासनिक संशोधन नहीं, बल्कि कोयला उद्योग में सुरक्षा व्यवस्था और ट्रेड यूनियनों की भूमिका पर दूरगामी प्रभाव डाल सकता है।

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क्या था Workers’ Inspector (WI) सिस्टम?

अब तक कोयला खदानों में मान्यता प्राप्त ट्रेड यूनियनों की ओर से Workers’ Inspector नियुक्त किए जाते थे। उनका मुख्य कार्य था :

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  • खदानों में सुरक्षा व्यवस्था का निरीक्षण करना।
  • मजदूरों की सुरक्षा संबंधी कमियों की पहचान करना।
  • दुर्घटना की आशंका वाले क्षेत्रों की जानकारी प्रबंधन तक पहुंचाना।
  • निरीक्षण के बाद Form-U में रिपोर्ट तैयार करना।
  • मजदूरों और प्रबंधन के बीच सुरक्षा संबंधी मुद्दों पर सेतु का कार्य करना।

यह व्यवस्था Mines Rules, 1955 के तहत लागू थी और दशकों से कोयला उद्योग में प्रचलित थी।

नए नियमों में क्या बदला?

श्रम एवं रोजगार मंत्रालय द्वारा अधिसूचित OSHWC (Central) Rules, 2026 में Workers’ Inspector की नियुक्ति या उनके निरीक्षण संबंधी कोई प्रावधान नहीं रखा गया है। इसी कारण अब:

  • Workers’ Inspector का वैधानिक दर्जा समाप्त हो गया।
  • Form-U निरीक्षण रिपोर्ट की अनिवार्यता भी खत्म हो गई।
  • ट्रेड यूनियनों के माध्यम से होने वाली औपचारिक सुरक्षा जांच की व्यवस्था समाप्त हो गई।

कोयला मजदूरों पर क्या असर पड़ेगा?

1. ट्रेड यूनियनों की निगरानी भूमिका होगी सीमित : पहले मजदूरों के प्रतिनिधि सीधे खदानों का निरीक्षण कर अपनी रिपोर्ट देते थे। अब यह अधिकार समाप्त होने से यूनियनों की प्रत्यक्ष सुरक्षा निगरानी सीमित हो सकती है।

2. सुरक्षा निरीक्षण का स्वरूप बदलेगा : अब सुरक्षा निरीक्षण की जिम्मेदारी मुख्य रूप से कंपनी प्रबंधन, DGMS और अन्य वैधानिक एजेंसियों पर रहेगी। इससे निरीक्षण प्रक्रिया अधिक केंद्रीकृत हो सकती है।

3. मजदूरों की शिकायतों का नया तंत्र विकसित करना होगा : यदि किसी खदान में सुरक्षा संबंधी समस्या सामने आती है, तो कर्मचारियों और यूनियनों को शिकायत दर्ज कराने के लिए नए संस्थागत तंत्र पर अधिक निर्भर रहना पड़ सकता है।

4. डिजिटल और संस्थागत निगरानी बढ़ने की संभावना : OSHWC Code का उद्देश्य निरीक्षण प्रणाली को अधिक आधुनिक और तकनीक आधारित बनाना भी है। भविष्य में डिजिटल ऑडिट, ऑनलाइन रिपोर्टिंग और जोखिम मूल्यांकन जैसी व्यवस्थाओं का विस्तार हो सकता है।

क्या सुरक्षा कमजोर होगी?

विशेषज्ञों का मानना है कि केवल Workers’ Inspector व्यवस्था समाप्त होने से सुरक्षा स्वतः कमजोर या मजबूत नहीं हो जाती। इसका प्रभाव इस बात पर निर्भर करेगा कि:

  • कंपनियां सुरक्षा मानकों का कितना कड़ाई से पालन करती हैं।
  • DGMS का निरीक्षण कितना प्रभावी रहता है।
  • कर्मचारियों की शिकायतों पर कितनी तेजी से कार्रवाई होती है।
  • सुरक्षा समितियां और संयुक्त निरीक्षण तंत्र कितने सक्रिय रहते हैं।

यदि इन व्यवस्थाओं को मजबूत नहीं किया गया, तो मजदूर संगठनों की चिंता बढ़ सकती है।

ट्रेड यूनियनों की प्रतिक्रिया अहम होगी

कोयला क्षेत्र की प्रमुख ट्रेड यूनियनें इस बदलाव को गंभीरता से देख रही हैं। संभावना है कि आने वाले दिनों में वे कोयला मंत्रालय और श्रम मंत्रालय से यह मांग करें कि मजदूरों की सुरक्षा निगरानी में उनकी भागीदारी किसी न किसी रूप में बनी रहे।

आगे क्या?

OSHWC Rules-2026 के लागू होने के बाद अब कोयला कंपनियों को अपनी आंतरिक सुरक्षा प्रणाली को और मजबूत करना होगा। साथ ही यह भी सुनिश्चित करना होगा कि कर्मचारियों की सुरक्षा से जुड़ी शिकायतों के समाधान के लिए पारदर्शी और प्रभावी व्यवस्था उपलब्ध रहे।

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IndustrialPunch Analysis

यह बदलाव केवल SECL तक सीमित नहीं है। चूंकि OSHWC Rules-2026 पूरे देश में लागू हैं, इसलिए Coal India की सभी सहायक कंपनियों, SCCL और अन्य खनन प्रतिष्ठानों में भी Workers’ Inspector व्यवस्था समाप्त होने की संभावना है। आने वाले समय में इसका प्रभाव पूरे भारतीय कोयला उद्योग की सुरक्षा व्यवस्था और औद्योगिक संबंधों पर दिखाई दे सकता है।

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