छोटी बचत योजनाओं में पश्चिम बंगाल का है सबसे बड़ा योगदान, मतदाता नाराज न हों इसलिए ब्याज दरों में कटौती का आदेश लिया वापस

मोदी सरकार ने छोटी बचत की योजनाओं पर ब्याज दरों में कटौती के फैसले को 24 घंटे के भीतर ही वापस ले लिया है। वित्त मंत्रालय की ओर से NSC और PPF सहित छोटी बचत योजनाओं पर ब्याज दरों में कटौती की अधिसूचना जारी करने के कुछ घंटों बाद ही वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इस आदेश को वापस लेने की घोषणा की है।

सोशल मीडिया पर भारी विरोध के बाद वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने गुरुवार को कहा कि सरकार छोटी बचत योजनाओं पर ब्याज दर घटाने के फैसले को वापस लेगी और उन्होंने ब्याज दरों को 31 मार्च को खत्म हुए वित्त वर्ष की आखिरी तिमाही के स्तर पर लाने का आश्वासन दिया। हालांकि, इसके बाद भी कांग्रेस ने सरकार पर हमला बोला है और और सवाल किया कि आप सरकार चला रहे हैं या सर्कस।

दरअसल, माना जा रहा है कि पश्चिम बंगाल, असम और तीन अन्य राज्यों में चल रहे विधानसभा चुनावों में भारतीय जनता पार्टी (BJP) को किसी नुकसान से बचाने के लिए ब्याज दरों में कटौती का फैसला वापस लिया है गया। एक रिपोर्ट के मुताबिक, नेशनल स्मॉल सेविंग फंड (NSSF) में पश्चिम बंगाल का योगदान सबसे ज्यादा है। यही वजह है कि सरकार ने बंगाली मतदाताओं की नाराजगी से बचने के लिए अपने फैसले को एक दिन में ही पलट दिया।

पश्चिम बंगाल ने कंट्रीब्यूट के मामले में उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र जैसे बड़े राज्यों को पीछे छोड़ दिया है। पिछले कुछ सालों में देखा गया है कि NSSF में बंगाल का योगदान लगातार बढ़ता गया। 2007-08 में जो 12.4 प्रतिशत था, वह 2009-10 में बढ़कर 14 फीसदी से अधिक हो गया। वहीं, 2017-18 में बढ़कर 15.1 प्रतिशत हो गया। 2017-18 में हुए 5.96 लाख करोड़ रुपये के स्मॉल सेविंग्स कलेक्शन में से बंगाल का कंट्रीब्यूट करीब 90,000 करोड़ रुपये था।

आपको बता दें कि छोटी बचत योजनाओं में निवेश करने वाले लोगों को झटका देते हुए केंद्र की BJP सरकार ने बुधवार को पब्लिक प्रोविडेंट फंड (PPF) और नेशनल सेविंग सर्टिफिकेट (NSC) समेत छोटी बचत की योजनाओं पर ब्याज दरों में 1.1 प्रतिशत तक की कटौती की थी। यह कटौती एक अप्रैल से शुरू हुए वित्त वर्ष 2021-22 की पहली तिमाही के लिए की गई थी। सोशल मीडिया यूजर्स और विपक्षी पार्टियों द्वारा इसका भारी विरोध किया गया।