विशेष लेख (IndustrialPunch Desk) : भारत में श्रम सुधारों के तहत लागू Industrial Relations Code, 2020 ने ट्रेड यूनियनों की मान्यता (Recognition of Trade Unions) और सामूहिक सौदेबाजी (Collective Bargaining) की व्यवस्था को नया स्वरूप दिया है। इस कानून का उद्देश्य औद्योगिक संबंधों को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और लोकतांत्रिक बनाना है। कोड में यह व्यवस्था की गई है कि किसी औद्योगिक प्रतिष्ठान में यदि एक से अधिक ट्रेड यूनियन कार्यरत हों, तो कर्मचारियों के समर्थन के आधार पर Negotiating Union या Negotiating Council का गठन किया जाए।
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इसी संदर्भ में अब यह सवाल तेजी से उठ रहा है कि देश की सबसे बड़ी सार्वजनिक क्षेत्र की कोयला कंपनी Coal India Limited (CIL) और उसकी सहायक कंपनियों में भी क्या सीक्रेट बैलेट (Secret Ballot) के माध्यम से मान्यता प्राप्त यूनियन का चयन होना चाहिए?
यह केवल चुनाव का प्रश्न नहीं है। यह लगभग ढाई लाख से अधिक कर्मचारियों के प्रतिनिधित्व, अरबों रुपये के वेतन समझौतों, सेवा शर्तों, औद्योगिक शांति और श्रमिक लोकतंत्र से जुड़ा विषय है।
वर्तमान व्यवस्था और JBCCI की भूमिका
Coal India में कर्मचारियों के वेतन, भत्तों और अन्य सेवा शर्तों पर राष्ट्रीय स्तर पर बातचीत Joint Bipartite Committee for the Coal Industry (JBCCI) के माध्यम से होती है। इसी समिति के जरिए National Coal Wage Agreement (NCWA) तैयार किया जाता है। NCWA केवल वेतन समझौता नहीं होता बल्कि इसमें कई महत्वपूर्ण विषय शामिल होते हैं :
- मूल वेतन एवं वेतन संशोधन
- महंगाई भत्ता (VDA)
- मेडिकल सुविधाएं
- अवकाश नियम
- सामाजिक सुरक्षा
- सेवा शर्तें
- कर्मचारियों के अन्य कल्याणकारी प्रावधान
स्वाभाविक है कि जिस यूनियन या यूनियनों को कर्मचारियों का प्रतिनिधित्व प्राप्त होता है, उनकी भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाती है।
आखिर सीक्रेट बैलेट क्या है?
सीक्रेट बैलेट एक ऐसी लोकतांत्रिक चुनाव प्रणाली है जिसमें प्रत्येक कर्मचारी बिना किसी दबाव, भय या प्रभाव के अपनी पसंद की यूनियन के पक्ष में मतदान करता है। मतदान पूरी तरह गोपनीय होता है। किसी कर्मचारी ने किस यूनियन को वोट दिया, इसकी जानकारी किसी अन्य व्यक्ति को नहीं होती। इसी कारण इसे विश्वभर में सबसे निष्पक्ष चुनाव प्रणाली माना जाता है।
लेबर कोड क्या कहता है?
Industrial Relations Code, 2020 की धारा 14 के अनुसार यदि किसी औद्योगिक प्रतिष्ठान में एक से अधिक पंजीकृत ट्रेड यूनियन हैं और किसी एक यूनियन को 51 प्रतिशत या उससे अधिक कर्मचारियों का सत्यापित समर्थन प्राप्त है, तो उसे Negotiating Union के रूप में मान्यता दी जाएगी।
यदि कोई भी यूनियन 51 प्रतिशत समर्थन प्राप्त नहीं कर पाती, तो कम से कम 20 प्रतिशत समर्थन रखने वाली यूनियनों के प्रतिनिधियों को मिलाकर Negotiating Council बनाई जाएगी। कानून यह भी परिकल्पना करता है कि समर्थन का सत्यापन निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार किया जाएगा।
केंद्र सरकार द्वारा पूर्व-प्रकाशित नियमों में Verification Officer की नियुक्ति तथा आवश्यक होने पर Secret Ballot के माध्यम से निष्पक्ष सत्यापन की व्यवस्था का भी उल्लेख किया गया है।
Coal India में सीक्रेट बैलेट क्यों आवश्यक माना जा रहा है?
- कर्मचारियों की वास्तविक पसंद सामने आएगी : अक्सर विभिन्न यूनियनें अपने सदस्य संख्या और जनाधार के अलग-अलग दावे करती हैं। यदि सीक्रेट बैलेट कराया जाए तो यह विवाद स्वतः समाप्त हो जाएगा कि वास्तव में कर्मचारियों का समर्थन किस यूनियन के साथ है।
- लोकतांत्रिक वैधता मजबूत होगी : यूनियनें सीधे कर्मचारियों द्वारा चुनी जाएंगी। इससे यह विश्वास बढ़ेगा कि कर्मचारियों की आवाज वास्तव में उसी संगठन तक पहुंच रही है जिसे उन्होंने स्वयं चुना है।
- Collective Bargaining अधिक प्रभावी होगी : जब किसी यूनियन के पास स्पष्ट जनादेश होगा तो प्रबंधन के साथ उसकी वार्ता अधिक मजबूत होगी। वेतन समझौते, प्रमोशन नीति, कार्य परिस्थितियों और अन्य श्रम मुद्दों पर बातचीत अधिक प्रभावी हो सकती है।
- पारदर्शिता बढ़ेगी : सीक्रेट बैलेट से प्रतिनिधित्व को लेकर विवाद कम होंगे। सदस्यता के दावों पर भ्रम समाप्त होगा। चुनाव प्रक्रिया अधिक विश्वसनीय बनेगी। परिणामों को व्यापक स्वीकार्यता मिल सकती है।
- यूनियनों में स्वस्थ प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी : यदि हर कुछ वर्षों में चुनाव होंगे तो प्रत्येक यूनियन को कर्मचारियों के बीच लगातार सक्रिय रहना होगा। केवल ऐतिहासिक पहचान पर्याप्त नहीं होगी। कर्मचारियों के लिए वास्तविक कार्य करने वाली यूनियनों को अधिक समर्थन मिलने की संभावना बढ़ेगी।
कर्मचारियों को क्या लाभ मिल सकता है?
यदि Coal India में Secret Ballot लागू होता है तो :
- प्रत्येक कर्मचारी का वोट समान महत्व रखेगा।
- कर्मचारियों की भागीदारी बढ़ेगी।
- यूनियनों की जवाबदेही बढ़ेगी।
- श्रमिक नेतृत्व अधिक लोकतांत्रिक होगा।
- प्रतिनिधित्व पर विश्वास मजबूत हो सकता है।
क्या कुछ चुनौतियां भी हैं?
इतनी बड़ी कंपनी में चुनाव कराना आसान कार्य नहीं होगा। Coal India की अनेक सहायक कंपनियां, सैकड़ों परियोजनाएं और विभिन्न राज्यों में फैले लाखों कार्यस्थल इस प्रक्रिया को जटिल बनाते हैं। मुख्य चुनौतियां हो सकती हैं:
- अद्यतन मतदाता सूची तैयार करना।
- पात्र कर्मचारियों का सत्यापन।
- निष्पक्ष मतदान व्यवस्था।
- चुनाव की निगरानी।
- परिणामों के आधार पर प्रतिनिधित्व तय करना।
- व्यवस्था में सहज संक्रमण।
- ट्रेड यूनियनों की अलग-अलग राय भी हो सकती है
अन्य सार्वजनिक उपक्रमों से क्या सीख मिलती है?
देश के कई सार्वजनिक उपक्रमों और औद्योगिक प्रतिष्ठानों में कर्मचारियों के प्रतिनिधित्व के निर्धारण के लिए Secret Ballot अथवा अन्य सत्यापन आधारित प्रणालियों का उपयोग किया गया है। इनका उद्देश्य किसी विशेष संगठन को लाभ पहुंचाना नहीं बल्कि कर्मचारियों के वास्तविक समर्थन का निष्पक्ष आकलन करना होता है।
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क्या Coal India बदलाव के लिए तैयार है?
Coal India आज केवल एक कोयला उत्पादक कंपनी नहीं है। यह देश की ऊर्जा सुरक्षा की रीढ़ है। ऐसे में इसके औद्योगिक संबंध भी समय के साथ आधुनिक, पारदर्शी और लोकतांत्रिक होने चाहिए।
यदि भविष्य में लेबर कोड के अनुरूप Secret Ballot आधारित व्यवस्था लागू होती है तो इससे प्रतिनिधित्व की प्रक्रिया अधिक स्पष्ट हो सकती है। वहीं, यदि मौजूदा प्रणाली जारी रहती है, तो भी यह आवश्यक होगा कि यूनियनों के प्रतिनिधित्व और कर्मचारियों के समर्थन के निर्धारण की प्रक्रिया पारदर्शी, निष्पक्ष और सभी पक्षों द्वारा स्वीकार्य हो।
Coal India में Secret Ballot लागू होना या न होना सरकार, प्रबंधन और ट्रेड यूनियनों के बीच नीति, कानून और आपसी सहमति का विषय है, लेकिन यह बहस निश्चित रूप से समय की मांग बन चुकी है।
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