Friday, July 31, 2026
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सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में अब सभी मान्यता प्राप्त यूनियनों से होगी नियमित IR बैठक

वित्त मंत्रालय का नया निर्देश: अल्पसंख्यक यूनियनों को भी मिलेगा संवाद का अवसर, 5 अगस्त तक संशोधित कैलेंडर भेजने के निर्देश

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नई दिल्ली | IndustrialPunch : सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (PSBs) में औद्योगिक संबंध (Industrial Relations-IR) को अधिक समावेशी और संस्थागत बनाने के उद्देश्य से वित्त मंत्रालय के वित्तीय सेवा विभाग (DFS) ने नया निर्देश जारी किया है।

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30 जुलाई 2026 को जारी आदेश में सभी राष्ट्रीयकृत बैंकों और भारतीय स्टेट बैंक (SBI) को निर्देश दिया गया है कि वे सभी मान्यता प्राप्त यूनियनों और एसोसिएशनों, जिनमें अल्पसंख्यक (Minority) यूनियनें भी शामिल हैं, के साथ नियमित एवं संरचित IR बैठकें आयोजित करें।

विभाग ने अपने 10 जुलाई 2026 के पूर्व निर्देश का हवाला देते हुए कहा कि बैंकों को IR बैठकों के लिए वार्षिक कैलेंडर तैयार करने और नियमित संवाद की व्यवस्था करने के लिए कहा गया था। हालांकि समीक्षा में पाया गया कि अधिकांश बैंकों ने केवल बहुसंख्यक (Majority) यूनियनों के साथ ही बैठकें निर्धारित की हैं, जिससे अन्य मान्यता प्राप्त यूनियनों को पर्याप्त अवसर नहीं मिल रहा है।

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प्रत्येक तिमाही में अल्पसंख्यक यूनियनों के लिए अलग बैठक

नए निर्देश के अनुसार, प्रत्येक तिमाही में अधिकारियों (Officers), कर्मचारियों (Workmen) और वेलफेयर श्रेणी के लिए एक अलग दिन निर्धारित किया जाएगा, जिसमें संबंधित श्रेणी की सभी मान्यता प्राप्त अल्पसंख्यक यूनियनों एवं एसोसिएशनों को एक साथ आमंत्रित कर उनकी समस्याएं और सुझाव सुने जाएंगे। इसका उद्देश्य प्रबंधन और सभी कर्मचारी संगठनों के बीच विश्वास बढ़ाना तथा विवादों के समयबद्ध समाधान के लिए संस्थागत संवाद को मजबूत करना है।

5 अगस्त तक संशोधित कैलेंडर भेजना होगा

DFS ने सभी बैंकों को निर्देश दिया है कि वे अपने IR बैठक कैलेंडर में आवश्यक संशोधन कर 5 अगस्त 2026 तक विभाग को संशोधित कार्यक्रम भेजें। साथ ही प्रत्येक तिमाही में आयोजित बैठकों की अनुपालन (Compliance) रिपोर्ट भी वित्तीय सेवा विभाग को प्रस्तुत करनी होगी।

कर्मचारी संगठनों ने किया स्वागत

इस निर्देश के बाद कई बैंक कर्मचारी संगठनों ने इसे सकारात्मक कदम बताया है। कुछ संगठनों का दावा है कि लंबे समय से सभी मान्यता प्राप्त यूनियनों को समान अवसर देने की मांग उठाई जा रही थी और नया निर्देश उसी दिशा में महत्वपूर्ण पहल है।

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यह निर्णय सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में औद्योगिक संबंधों को अधिक पारदर्शी, सहभागी और संतुलित बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जिससे विभिन्न कर्मचारी संगठनों को अपनी समस्याएं सीधे बैंक प्रबंधन के समक्ष रखने का नियमित मंच उपलब्ध होगा।

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