कोरबा | IndustrialPunch : कोल इंडिया लिमिटेड (CIL) की 62वीं सेफ्टी बोर्ड बैठक के बाद भारतीय मजदूर संघ (BMS) से जुड़े संगठन अखिल भारतीय खदान मजदूर संघ (ABKMS) के भीतर प्रतिनिधित्व को लेकर विवाद गहराता नजर आ रहा है। संगठन के सूत्रों के अनुसार, सेफ्टी बोर्ड में प्रतिनिधि की नियुक्ति को लेकर संगठन के अधिकारों पर अतिक्रमण के आरोप लगाए जा रहे हैं।
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जानकारी के अनुसार, 30 जुलाई 2026 को कोलकाता स्थित कोल इंडिया मुख्यालय में आयोजित 62वीं सेफ्टी बोर्ड बैठक में ईसीएल क्षेत्र के नरेंद्र कुमार सिंह ने अखिल भारतीय खदान मजदूर संघ के प्रतिनिधि के रूप में भाग लिया। हालांकि संगठन से जुड़े सूत्रों का दावा है कि नरेंद्र कुमार सिंह को सेफ्टी बोर्ड के लिए अखिल भारतीय खदान मजदूर संघ की ओर से विधिवत अधिकृत या नामित नहीं किया गया था।
नियुक्ति प्रक्रिया पर उठे सवाल
सूत्रों का कहना है कि कोल इंडिया और उसकी सहायक कंपनियों में प्रतिनिधियों की नियुक्ति का अधिकार अखिल भारतीय खदान मजदूर संघ को प्राप्त है तथा इस संबंध में औपचारिक आदेश संगठन के महामंत्री द्वारा जारी किए जाते हैं।
आरोप है कि इस मामले में निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया और बिना संगठन की औपचारिक स्वीकृति के प्रतिनिधि को सेफ्टी बोर्ड बैठक में शामिल कराया गया।
के. लक्ष्मा रेड्डी की भूमिका पर सवाल
संगठन के भीतर यह भी आरोप लगाए जा रहे हैं कि भारतीय मजदूर संघ के कोल प्रभारी के. लक्ष्मा रेड्डी ने स्वयं हस्तक्षेप करते हुए कोल इंडिया प्रबंधन को पत्र भेजा और अपनी सिफारिश के आधार पर नरेंद्र कुमार सिंह को बैठक में शामिल कराया।
प्रबंधन की भूमिका भी सवालों के घेरे में
संगठन के पदाधिकारियों का कहना है कि यदि प्रतिनिधि नियुक्त करने का अधिकार अखिल भारतीय खदान मजदूर संघ के पास है, तो फिर कोल इंडिया प्रबंधन ने संगठन की अधिकृत अनुशंसा के बजाय किसी अन्य स्तर से प्राप्त पत्र या सिफारिश को किस आधार पर स्वीकार किया?
आंतरिक नाराजगी बढ़ने के संकेत
सूत्रों के मुताबिक, इस पूरे मामले को लेकर अखिल भारतीय खदान मजदूर संघ के कई पदाधिकारियों ने भारतीय मजदूर संघ के शीर्ष नेतृत्व के समक्ष अपनी आपत्ति दर्ज कराई है। यह भी दावा किया जा रहा है कि इससे पहले भी के. लक्ष्मा रेड्डी पर कोल इंडिया और उसकी सहायक कंपनियों के मामलों में संगठन के अधिकृत पदाधिकारियों को दरकिनार कर सीधे हस्तक्षेप करने के आरोप लगते रहे हैं। इसको लेकर संगठन के भीतर असंतोष बढ़ता बताया जा रहा है।
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आधिकारिक स्थिति का इंतजार
फिलहाल इस पूरे विवाद पर कोल इंडिया लिमिटेड, भारतीय मजदूर संघ, अखिल भारतीय खदान मजदूर संघ अथवा के. लक्ष्मा रेड्डी की ओर से कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है। यदि संबंधित पक्ष अपना पक्ष रखते हैं तो उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।
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