कोलकाता | IndustrialPunch : देश की सबसे बड़ी कोयला उत्पादक कंपनी Coal India Limited (CIL) ने ऊर्जा क्षेत्र में विविधीकरण की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाते हुए तेलंगाना के चौटुप्पल में 187.5 मेगावाट/750 मेगावाट-घंटा (MWh) बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली (Battery Energy Storage System-BESS) विकसित करने के लिए निविदा (Tender) जारी की है।
यह परियोजना कंपनी की स्वच्छ ऊर्जा (Clean Energy) और ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा मानी जा रही है।
टेंडर के अनुसार, परियोजना का विकास पूर्ण EPC (Engineering, Procurement & Construction) मोड में किया जाएगा। इसके साथ ही सफल बोलीदाता को 15 वर्षों तक व्यापक संचालन एवं रखरखाव (Comprehensive Operation & Maintenance) की जिम्मेदारी भी निभानी होगी। निविदा 29 जुलाई 2026 को जारी की गई है, जबकि तकनीकी बोलियां 20 अगस्त 2026 को खोली जानी प्रस्तावित हैं।
ग्रिड स्थिरता और नवीकरणीय ऊर्जा को मिलेगा बल
बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली (BESS) का उपयोग सौर और पवन जैसी नवीकरणीय ऊर्जा के बेहतर एकीकरण, पीक आवर्स में बिजली उपलब्ध कराने और ग्रिड की स्थिरता बनाए रखने के लिए किया जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह की परियोजनाएं भारत के ऊर्जा क्षेत्र में भविष्य की जरूरतों को पूरा करने में अहम भूमिका निभाएंगी।
Coal India की बदलती रणनीति
अब तक कोयला उत्पादन पर केंद्रित रही Coal India पिछले कुछ वर्षों से सौर ऊर्जा, बैटरी स्टोरेज, कोल गैसीफिकेशन और स्वच्छ ऊर्जा परियोजनाओं में भी तेजी से निवेश कर रही है। तेलंगाना की यह BESS परियोजना इस बदलाव का एक महत्वपूर्ण उदाहरण मानी जा रही है।
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भारत में नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता तेजी से बढ़ रही है। ऐसे में बैटरी स्टोरेज परियोजनाएं भविष्य की बिजली व्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार बनेंगी। Coal India का इस क्षेत्र में निवेश यह संकेत देता है कि कंपनी आने वाले वर्षों में केवल कोयला उत्पादक कंपनी नहीं, बल्कि एकीकृत ऊर्जा कंपनी (Integrated Energy Company) के रूप में अपनी पहचान मजबूत करना चाहती है।
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