राज्यसभा में पूछा गया, क्या सरकार को पता है कोयला खदानों में पीने का पानी और शौचालय का अभाव है?, यह मिला जवाब …

राज्यसभा सदस्य दीपक प्रकाश ने सवाल पूछा था कि, क्या सरकार को इस बात की जानकारी है कि कोयला खदानों में कार्यरत मजदूरों या कर्मचारियों के लिए पीने के पानी और शौचालय संबंधी मूलभूभ सुविधाओं का अभाव है।

नई दिल्ली, 01 दिसम्बर। राज्यसभा में कोयला खदानों में मूलभूत सुविधाओं के संबंध में सवाल उठाया गया। राज्यसभा सदस्य दीपक प्रकाश ने सवाल पूछा कि, क्या सरकार को इस बात की जानकारी है कि कोयला खदानों में कार्यरत मजदूरों या कर्मचारियों के लिए पीने के पानी और शौचालय संबंधी मूलभूभ सुविधाओं का अभाव है।

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इस पर कोयला मंत्री प्रल्हाद जोशी ने लिखित जवाब में यह जानकारी दी :

कोयला कंपनियां खान नियम 1955 के अनुसार कोयला खानों में कार्यरत मजदूरों या कर्मचारियों के लिए पीने के पानी और शौचालय संबंधी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध करा रही हैं। खान नियम 1955 में किए गए प्रावधान इस प्रकार हैं :

पीने का पानी

खान नियम 1955 के अनुसार किसी खान या उसके किसी भाग में उपलब्ध कराए जाने वाले ठंडे और स्वास्थ्य कर पेयजल की मात्रा किसी भी समय कार्यरत प्रत्येक व्यक्ति के लिए 2 लीटर के पैमाने पर होगी और पीने का ऐसा पानी कार्य करने की पूरी शिफ्ट के दौरान सुगमता से सुलभ स्थानों पर तत्काल उपलब्ध है।

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शौचालय

शौचालय का पैमाना एक समय में कार्यरत प्रत्येक 50 पुरुषों के लिए एक सीट और प्रत्येक 50 महिलाओं के लिए कम से कम 1 सीट है।

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