कोरबा, 13 मार्च (Industrial Punch Desk) : छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत उत्पादन कंपनी (CSPGCL) की गारे पाल्मा- III भूमिगत खदान के उत्पादन में नहीं आने से मड़वा संयंत्र (Madwa Plant) के समक्ष कोयले की कमी उत्पन्न हो गई है। इसी तहर खुली खदान से भी माइनिंग प्लान के अनुरूप पर्याप्त कोयला नहीं मिल रहा है। कोयला मंत्रालय से लगभग डेढ़ मिलियन टन (MT) ईंधन आपूर्ति का लिंकेज देने की मांग रखी गई है।
यहां बताना होगा कि छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत उत्पादन कंपनी को रायगढ़ जिले में स्थित गारे पाल्मा- III कोल ब्लॉक का आबंटन सितम्बर 2025 में हुआ था। यह आबंटन कंपनी के 1000 मेगावाट (MW) क्षमता वाले जांजगीर चांपा में स्थित मड़वा थर्मल पॉवर प्लांट (Madwa TPP) की कोयला जरूरतों को पूरा करने के लिए किया गया था।
कंपनी के माइनिंग प्लान के अनुसार गारे पाल्मा- III की कोयला उत्पादन क्षमता 5 मिलियन टन सालाना है। इसमें 4 एमटी ओपनकास्ट तथा एक एमटी भूमिगत खदान की उत्पादन क्षमता सम्मिलित है। कंपनी ने 2023- 24 में ओपनकास्ट खदान से 4 एमटी कोयला उत्पादन दर्ज किया था, जो माइनिंग प्लान के अनुरूप था।
इधर, गारे पाल्मा- III की भूमिगत खदान उत्पादन में नहीं आ सकी है। इस कारण एक मिलियन टन कोयला नहीं मिल पा रहा है। कंपनी ने बताया कि भूमिगत खदान 2023- 31 तक उत्पादन में आ सकेगी।
कंपनी ने बताया है कि गारे पाल्मा- III के ओपनकास्ट खदान में अंदरूनी डंप के ओवरबर्डन लोड को ध्यान में रखते हुए, प्रस्तावित अंडरग्राउंड ड्राइवेज के लिए सपोर्ट सिस्टम के डिज़ाइन के लिए साइंटिफिक स्टडी का काम सीआईएमएफआर को सौंपा गया है। सीआईएमएफआर ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि सुरक्षित अंडरग्राउंड माइन ऑपरेशन के लिए, माइनिंग ऑपरेशन शुरू होने के कम से कम 09 साल बाद इनक्लाइन का ड्राइवेज शुरू होना चाहिए। इसके अनुसार इनक्लाइन का ड्राइवेज मार्च 2028 से शुरू होगा।
छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत उत्पादन कंपनी ने बताया कि इसको देखते हुए माइनिंग प्लान को रिवाइज़ किया जा रहा है। इस कारण ओपनकास्ट खदान से भी करीब आधा मिलियन टन कोयला कम मिलेगा।
विद्युत मंत्रालय ने संशोधित शक्ति नीति, 2025 की विंडो-I के तहत छत्तीसगढ़ राज्य को मड़वा टीपीपी के लिए 0.415 एमटीपीए के कोयला लिंकेज पर विचार करने का अनुरोध कोयला मंत्रालय से किया है। इसके अलावा, विद्युत मंत्रालय ने गारे पाल्मा- III की UG खदान से कोयले के गैर-उत्पादन के बदले छत्तीसगढ़ राज्य को अतिरिक्त एक मिलियन टन मध्यम अवधि लिंकेज देने का भी अनुरोध किया गया है। विद्युत मंत्रालय ने कहा है कि मड़वा TPP को नोटिफाइड कीमत पर कोयले की सप्लाई से बिजली सस्ती मिलेगी।
विद्युत क्षेत्र को कोयला लिंकेज वर्तमान में संशोधित शक्ति नीति, 2025 के अंतर्गत प्रदान किए जाते हैं। संशोधित शक्ति नीति के अंतर्गत, किसी राज्य को कोयला लिंकेज उनके अनुरोध के अनुसार और विद्युत मंत्रालय की सिफारिश दिया जाता है।
16 मार्च, 2026 को कोयला मंत्रालय की स्टैंडिंग लिंकेज कमेटी (SLC) की बैठक होनी है। इस बैठक में मांग के अनुसार छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत उत्पादन कंपनी को लगभग डेढ़ मिलियन टन कोयला लिंकेज देने पर विचार किया जाएगा।
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