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कोरबा, 12 अगस्त। कोल इंडिया सेफ्टी बोर्ड (CIL Safety Board) की 61वीं बैठक में एचएमएस (HMS) के प्रतिनिध अख्तर जावेद उस्मानी ने खदान सुरक्षा से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों को उठाया। यह बैठक 11 माह के अंतराल पर सोमवार को सीआईएल मुख्यालय में चेयरमैन पीएम प्रसाद की अध्यक्षता में आयोजित हुई। सीआईएल सेफ्टी बोर्ड सदस्य एवं एचएमएस नेता श्री उस्मानी द्वारा बैठक में प्रस्तुत बिन्दु :
- अक्टूबर 2024 से जुलाई 2025 तक कुल 24 प्राण घातक दुर्घटनाओं के सम्बंध दिये गये डेटा के अनुसार इसमें 9 ठेकेदारी मजदूर 9 परमानेंट मजदूर 5 माइनिंग सुपरवाईजरी स्टाफ़ (दो सरदार और तीन ओव्हरमैन) और 1 असिस्टेन्ट मैनेजर हैं। अधिकारी और सुपरवाईजरी पर्सनल कुल प्राणघातक दुर्घटनाओं की संख्या का 25% हैं। जो बहुत चिंता की बात है।
- बिना किसी कैपेसिटी एडिशन (क्षमता विस्तार) के उत्पादन लक्ष्यों को बढ़ाने और उसे पूरा होने के लिये दबाव बनाने से श्रमिकों सुपरवाईजरी पर्सनल के साथ अधिकारीयों की मानसिक उत्पीड़न के साथ दुर्घटनाओं में वृद्धि हुई है।
- Noise Induced Hearing Loss के प्रकरणों में 200 से अधिक प्रकरणों की जानकारी पर हिन्द मजदूर सभा ने बताया कि यह स्थिति कम ओ बेश सभी कंपनियों में है। डीजीएम एस के टेक्निकल सर्कुलर नम्बर 18 वर्ष , 1975 के अनुसार शोर की सीमा 85 डेसीबल ए रखी गई थी। और 90 डेसीबल ए से उपर के शोर को ख़तरनाक माना गया है। केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा इन्डस्ट्रियल काम्प्लेक्स के लिये दिन में पचहत्तर डैसीबल ए और रात दस बजे से सुबह छः बजे तक सत्तर डेसीबल ए मानी गई है। आस्ट्रेलिया में सत्तर डेसीबल ए शोर की अधिकतम सीमा रखी गई है। डीजीएमएसओ को इस सर्कुलर के स्थान पर नया सर्कुलर जारी करने की आवश्यकता है।
- इसी प्रकार वर्क प्लेस एम्बीएंस पर कोयला मंत्रालय के ज़ोर दिये जाने पर डीजीएम एस का ध्यान आकर्षित करते हुते 30° सेंटीग्रेड तक वेट बल्ब टेम्परेचर भी बहुत अधिक है और इतनी गर्मी में आठ घंटे काम कर पाना नामुमकिन है और इस सीमा में भी सुधार की आवश्यकता है।
- स्टेच्यूट्री पर्सनल के गैप एनालिसिस के दौरान इलेक्ट्रिशियन को स्टेच्यूट्री पर्सनल न मानने के ज़िक्र करते हुते पूर्व में डिप्टी डायरेक्टर जनरल माइंस सेफ्टी इलेक्ट्रिकल द्वारा इलेक्ट्रिशियन को स्टेच्यूट्री पर्सनल मान कर गैप एनालिसिस करने की बात रखी गई। इलेक्ट्रिशियन की जबरदस्त कमी बड़े ख़तरों की संभावना को दर्शाता है
- स्टेच्यूट्री पर्सनल के कैरियर ग्रोथ की बात रखते हुते एजेंडा नोट में पिट बाटम बफ़र के बदलने के साथ बैंक्समैन और आनसेटर के पद भी पिट बाटम बफ़र से जुड़े हुये हैं यह बात रखी गई। एक्शन टेकन रिपोर्ट में हर खदान में बाड़ी सर्चिंग हो रही है इसका ज़ोरदार खण्डन करते हुये कोल इंडिया लिमिटेड सुरक्षा विभाग के अधिकारीयों को चल कर निरिक्षण करने की चुनौती दी गई। वाइंडिंग इंजन मैंन, बाड़ी सर्चर, आनसेटर बैंक्समैन (रेगुलेशन, 55, 56 और 172 (3) तथा सीडीएस आपरेटर पद को एक्स कैडर बताने वाली कमेटी का विरोध करते हुये सीडीएस सिस्टम को इंनडेशन चासनाला और बाड़ी सर्चर पद को धोरी फ़ायर के बाद बनाया गया था। इलेक्ट्रिकल सुपरवाइजर को भी कोरियर ग्रोथ और रिस्ट्रिक्टेड सर्टिफिकेट होल्डर ओव्हरमैन माइनिंग सरदार के भी कैरियर ग्रोथ पर विचार किया जाना चाहिये। कैडर स्कीम कमेटी को यह बिषय सौंपा जाना चाहिये।
- एक्सीडेंट के बाद रिहैबिलिटेशन एक बहुत आवश्यक कदम है। ठेकेदारी मजदूरों को मरणोपरांत ग्रेच्यूटी का भुगतान नहीं हो रहा है। जब कंपनी के साथ ठेकेदार का सभी श्रम कानूनों को मानने का क़रार है तो ग्रेच्यूटी का भुगतान न करना अन्याय है। जो मजदूर बीमार हो रहे हैं उन्हें 50% बेसिक और डीए का दिया जा रहा है। सब कमेटी डिस्कशन्स में यह बताया गया कि एम्पलाइज़ कम्पेनसेशन एक्ट 1923 के प्रावधान का अनुपालन है। यदि ऐसा है तो पहले इसे इंज्यूरी या व्यवसायिक बीमारी घोषित करना होगा। स्पेशल हाफ़ पे लीव में 100% बेसिक + डीए + एसडी का भुगतान किया जाये।
- ठेकेदारी मजदूरों के इलाज के लिये कोई स्पष्टता नहीं है और अलग अलग कंपनियों में अलग अलग अभ्यास हैं। कौन मेडिकल कार्ड बनायेगा कौन फ़ोटो सर्टिफ़ाई करेगा आदि इत्यादि। स्पष्ट दिशा निर्देशों के अतिरिक्त ठेकेदारी मजदूर के परिवार का भी इलाज होना चाहिये।
- इनिशियल मेडिकल एक्जामिनेशन और पिरियाडिकल मेडिकल एक्जामिनेशन के लिये न केवल मशीनों की क्षमता और गुणवत्ता में कमी है, इसके लिये मेडिकल/तकनीकी स्टाफ़ की कमी के गैप एनालिसिस में ठेकेदारी मजदूरों की आईएमइ और पीएमई संख्या का ध्यान भी रख कर ही मेडिकल/तकनीकी स्टाफ़ की कमी भविष्य की ज़रूरत को ध्यान में रख कर पुनः गैप एनालिसिस किया जाना चाहिये।
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